चैत्यभूमि पर अनुयायियों को आने से रोकना बड़ी चुनौती


मुंबई

6 दिसंबर को भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर कई साल से लाखों अनुयायी दादर स्थित चैत्यभूमि पर आते हैं। इस साल कोरोना संकट को देखते हुए महापौर किशोरी पेडणेकर व मनपा आयुक्त आईएस चहल ने अनुयायियों से चैत्यभूमि पर न आने की अपील की थी। साथ ही सरकार द्वारा महापरिनिर्वाण दिन के अवसर पर होने वाली मानवंदना व पुष्पवर्षा का लाइव प्रसारण कई माध्यमों से करने की व्यवऌस्था की गई है, जिससे घर बैठे लोग महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम को देख सकें। बावजूद इसके चैत्यभूमि पर अनुयायियों की भीड़ रोकना मनपा के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि हर साल महापरिनिर्वाण दिवस पर लाखों अनुयायी यहां आते हैं। मनपा को आशंका है कि चैत्यभूमि पर न आने की अपील के बाद भी लोग यहां आ सकते हैं। इस बीच शनिवार को 6 दिसंबर के एक दिन पहले तक कोरोना संकट को देखते हुए अभी तक वैसा नजारा नहीं दिखाई दिया है। मेयर किशोरी पेडणेकर ने शनिवार को कहा कि हमारी अपील का जनता ने अच्छा प्रतिसाद दिया है, क्योंकि अभी तक यहां कम ही लोग देखने को मिले हैं। उन्होंने आंबेडकर अनुयायियों से फिर अपील की है कि वे महापरिनिर्वाण दिवस पर चैत्यभूमि पर न आएं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि शनिवार को वहां पुलिस बंदोबस्त काफी मजबूत किया गया, जिससे आंबेडकर अनुयायी चैत्यभूमि तक न जा सकें, जो अनुयायी वहां तक पहुंच जाएं, उनके लिए गेट के बाहर बड़ी- बड़ी स्क्रीन लगाई गई है, जिससे वे बाहर से ही कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण देख सकें। बीएमसी सूत्रों के मुताबिक कोरोना संकट को देखते हुए सिर्फ वीआईपी लोगों को ही चैत्यभूमि तक जाने की व्यवस्था की गई है। आम लोगों को वहां तक जाने की परमिशन नहीं है। मेयर पेडणेकर ने कहा कि हर साल महापरिनिर्वाण दिवस से पहले यहां बीएमसी की तरफ से बड़े पैमाने पर अनुयायियों के लिए मूलभूत सुविधा की व्यवस्था की जाती थी। इस साल स्थिति अलग है, इसलिए हमारा अनुयायियों से अनुरोध है कि वे चैत्यभूमि न आएं। 5 दिसंबर को यहां अनुयायी नहीं आए हैं, हमें उम्मीद है कि 6 दिसंबर को भी नहीं आएंगे। 


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