अयोध्या को बुलेट ट्रेन की सौगात

साधु-संत ने पीएम मोदी को दिया धन्यवाद

bullet train

लखनऊ

 उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बीच प्रदेश वासियों को केन्द्र सरकार ने एक और सौगात दी है। दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए केन्द्र सरकार ने अयोध्या में भी रेलवे स्टेशन बनाने का फैसला किया है। यूपी में बुलेट ट्रेन चलाने को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। बुलेट ट्रेन चलने के बाद 865 किलोमीटर लंबे ट्रैक की यह दूरी महज चंद घंटों की रह जाएगी। साथ ही केन्द्र सरकार ने दिल्ली और वाराणसी कॉरिडोर में उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। अयोध्या में बुलेट ट्रेन चलने की खबर के बाद साधु-संतों ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद कहा है। साधु-संतों ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि अयोध्या के साथ प्रयागराज और मथुरा को भी बुलेट ट्रेन की सेवा से जोड़ा जाए, जिससे श्रद्धालुओं को धार्मिक स्थलों पर पहुंचने में आसानी हो सके।

हेलीकॉप्टर से होगा ट्रैक का सर्वे

दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की जमीनी पैमाइश हेलीकॉप्टर से कराई जाएगी। इस सर्वे को रक्षा मंत्रालय से हरी झंडी मिल चुकी है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) हवाई जमीनी सर्वे में लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग सर्वे (लिडार) तकनीक से कराया जाएगा। यह बुलेट ट्रेन के ट्रैक के लिए होगा। ट्रैक का अधिकतर हिस्सा एलीवेटेड या अंडरग्राउंड ट्रैक का होगा। कॉरिडोर की कनेक्टिविटी कानपुर और लखनऊ शहरों से होगी। इसका मतलब शहरी भी इस ट्रैक पर चलने वाली बुलेट ट्रेनों के सफर का लुत्फ भविष्य में उठा सकेंगे। तीन साल पहले रेल प्रशासन ने दिल्ली से वाराणसी 800 किमी की दूरी के लिए बुलेट ट्रेन चलाने का फैसला लिया था। रेलवे परंपरागत तरीके से सर्वे कराता तो इसमें सवा से डेढ़ साल का समय लगता पर लिडार तकनीक से हवाई सर्वे में बमुश्किल 12-15 सप्ताह ही लगेंगे। दिल्ली वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की डिटेल प्रोजक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए हेलीकॉप्टर पर लेजर सक्षम उपकरणों का उपयोग किया गया है। एक तरह से सर्वे की यह आधुनिक तकनीक है।


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