तामिलनाडु के राजनीतिक क्षितिज पर उतरे दो सितारे

तामिलनाडु की राजनीति और रजत पट का पुराना नाता है और पिछले कई दशकों से तमिलनाडु की राजनीति में तमिल सिनेमा से जुड़े सितारों का बोल बाला रहा है. एम जी रामचंद्रन, करूणानिधि और जयललिता जैसे फिल्मी दुनिया की नामचीन और करिश्माई नेताओं ने उस समय राज्य में अपनी सत्ता बरकरार रखी, जब देश की राजनीति में कांग्रेस का या भाजपा का डंका बजता था. एम जी आर के अवसान के बाद उनकी खाली जगह को जयललिता ने बड़ी कुशलता से भरा, सत्ता की धुरी कभी उनके और कभी करू णानिधि के इर्द गिर्द घूमती रही. यह पहला चुनाव है जब ये दोनों करिश्माई नेता अपनी-अपनी पार्टियों का नेतृत्व करने के लिए नहीं रहे. करूणानिधि की पार्टी डीएमके के पास स्टॉलिन के रू प में एक तेज़तर्रार और करिश्माई नेता है जबकि एआइडीएमके के पास भले ही सत्ता है लेकिन उनके नेता पनीरसेल्वन को उतना करिश्माई नहीं माना जा रहा है. एआइडीएमके और भाजपा का और कांग्रेस तथा डीएमके का गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है. कमल हासन और रजनीकांत, आज तमिलनाडु ही नहीं देश के लोक प्रिय अभिनेता है और वहां की परंपरा के अनुरूप दोनों पिछले लम्बे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय होने का संकेत देते रहे हैं. कमल हासन ने तो अपनी पार्टी भी बना ली है. अब रजनीकांत ने भी यह घोषणा कर दी है कि वे अपनी नयी पार्टी की घोषणा 31 दिसंबर को करेंगे. इसमें कुछ अप्रत्याशित नहीं है क्योंकि वे पिछले लम्बे समय से अपने व्यक्तिगत संगठन के माध्यम से जनसंपर्क के काम सतत जारी रखे हुए हैं. अब उन्होंने नयी पार्टी के गठन की स्पष्ट घोषणा कर एक तरह से अगले विधानसभा चुनाव में उतरने की मुनादी कर दी है. मतलब साफ़ है कि इस बार अप्रैल में होने वाला तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव अब काफी रोचक होने जा रहा है. एआइडीएमके और भाजपा के गठजोड़ की घोषणा अभी हाल में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह चेन्नई में कर चुके हैं, और जिस तरह अतीत में रजनीकांत भाजपा की केंद्र सरकार के कश्मीर नीति और नोट बन्दी का समर्थन कर चुके है उससे यह कयास लगाना कोई कठिन बात नहीं है कि उनका भी झुकाव उक्त गठबन्धन की ओर हो सकता है. तो जो एआइडीएमके अभी तक कमजोर विकेट पर दिख रही थी वह अचानक फिर लड़ाई में आ गयी है. और पिछले दो टर्म से सत्ता से दूर डीएमके के सामने सत्ता में वापस आने की राह कठिन हो गयी है.

भाजपा का परचम आज पूरे देश में मजबूती से लहरा रहा है और उसकी नजर अब उन राज्यों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की है जहां उसका आधार कमजोर है. एआईडीएमके के नेतृत्व की कमज़ोरी उसके लिए खाद है, यह भाजपा नेतृत्व जानता है और उस पर यदि रजनीकांत का साथ मिल जाय तो यह सोने पर सुहागे का काम करेगा. जबकि डीएमके को अपनी पार्टी में ही बगावत का सामना करना पड़ रहा है साथ ही उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस का वजूद भी आज काफी संकट में है. ऐसे में वह इस बार की लड़ाई में वह क्या गुल खिला पाती है इस पर संदेह है. देखना यह है कि कमल हासन किस पाले में जाते है या वे भी जो पाला मजबूत नजर आता है उसके बन जाते हैं. कुल मिलाकर इन दोनों अभिनेताओं की एंट्री और भाजपा की राज्य में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की पुर जोर कोशिश ने तमिलनाडु के चुनाव को और रोचक बना दिया है. देखना यह है कि इन दोनों सितारों की चुनावी समर में मौजूदगी तमिलनाडु चुनाव में क्या क्या गुल खिलाती है, अभी तो शुरुआत है आगे बहुत कुछ होना बाकी है.

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