थोक महंगाई दर नौ महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची


नई दिल्ली 

थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में 1.55 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले महीने 1.48 प्रतिशत थी। सरकार ने आंकड़े जारी करते हुए बताया है कि विनिर्मित उत्पाद महंगे हो गए, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी आई है। बता दें अक्टूबर 2020 में मुद्रास्फीति 1.48 प्रतिशत और पिछले साल नवंबर में 0.58 प्रतिशत थी। इस दौरान ईंधन और बिजली की महंगाई दर ऋणात्मक 9.87 प्रतिशत थी। फरवरी से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति का यह उच्चतम स्तर है, जब यह 2.26 प्रतिशत था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में खाद्य वस्तुओं के दाम घटे, जबकि इस दौरान विनिर्मित उत्पाद महंगे हुए। नवंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, लेकिन विनिर्मित वस्तुओं में कीमतों में उछाल देखी गई। त्योहारी सीजन में विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में तेजी के चलते थोक महंगाई दर में यह तेजी दर्ज की गई है। नवंबर में खाद्य मुद्रास्फीति 3.94 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने में 6.37 प्रतिशत थी। सब्जियों में आलू की कीमत में वृद्धि दर 12.24 प्रतिशत और महीने के दौरान 115.12 प्रतिशत रही। बता दें थोक महंगाई दर के जरिए थोक में बिकने वाली वस्तुओं की कीमतों के बारे में जानकारी मिलती है। भारत में, होलसेल प्राइस इंडेक्स तीने समूह में बांटा गया है। ईंधन एवं पावर , प्राइमरी वस्तु और मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद शामिल है। नवंबर में गैर-खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 8.43 प्रतिशत अधिक थी। इस महीने की शुरूआत में आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति में कहा था कि सर्दियों के महीनों में क्षणिक राहत को छोड़कर मुद्रास्फीति बढ़ेगी। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर खुदरा मुद्रास्फीति की दर 6.8 प्रतिशत थी। 


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