नए कृषि कानून से अन्नदाता का चौतरफा फायदा: खोत

sadabhau khot

जितेंद्र मिश्रा 

रयत क्रांति संघटना के अध्यक्ष और पूर्व राज्यमंत्री सदाभाऊ खोत का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानून से न केवल किसानों के हितों की रक्षा होगी, बल्कि उन्हें यह कानून मंडियों की बेड़ियों से मुक्ति दिलाता है, इसलिए नए कृषि कानून से अन्नदाता का चौतरफा फायदा होगा। कानून के विरोध में अनावश्यक आंदोलन करना सही नहीं है, क्योंकि इस कानून के लागू होने से किसान कहीं भी जाकर अपना अनाज बेच सकता है। कोरोना काल के दौरान राज्य सरकार ने किसानों के साथ आम जनता के लिए कुछ काम नहीं किया। राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल तीनों पार्टियों के बीच समन्वय नहीं है, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार आ जाएगी, इस डर से वे एकजुट होकर चिपके हुए हैं और सरकार चला रहे है। ऐसे कई मुद्दों पर सदाभाऊ खोत के साथ बातचीत के प्रमुख अंश। 

 कृषि कानून को लेकर राज्य सहित पूरे देश में आंदोलन शुरू है, इसे लेकर आप क्या कहेंगे? 

देखिये, राज्य सहित पूरे देश के किसानों के प्रति हमारे मन में बहुत सम्मान है, लेकिन कई ऐसी राजनीतिक पार्टियां हैं, जो उन्हें भड़काने और गुमराह करने का काम कर रही है। कृषि कानून किसानों के हित में है। 70 साल के बाद देश में ऐसा कानून आया है, जो किसानों के उत्थान और उन्हें समस्याओं से मुक्ति दिलाने वाला कानून है। इस आंदोलन में सिर्फ दो ही राज्य के किसान शामिल हैं। पंजाब के किसान तो अपने राज्य में खेती कर रहे है, जबकि हरियाणा के किसान के साथ यूपी और बिहार के लोग काम करते हैं, जो किसान राजनीतिक पार्टियों के साथ जुड़े हैं, उन्हें इस कानून के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी है, लेकिन जो किसान नहीं जुड़े है, उन्हें कुछ राजनीतिक पार्टियां गुमराह करने का काम कर रही हैं। 

क्या नए कृषि कानून से किसानों को नुकसान होगा? 

इस नए कृषि कानून से किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा। मंडियों में अनाज खरीदी के समय सिर्फ दो से तीन सौ लायसेंस धारक आढ़तिया लोग रहते हैं, जबकि इस नए कानून के लागू होने पर अनाज को खरीदने के लिए कारपोरेट जगत के भी लोग किसान से अनाज खरीद सकते हैं। इसके साथ किसानों का ट्रांसपोर्ट का खर्चा बच जाएगा। इस नए कानून के आने पर किसान खेतों या किसी और भी मंडी में जाकर अपना अनाज बेच सकता है। दूसरी बात किसानों की कंपनियां तैयार हो जाएगी। जो आरोप है कि इस कानून से उद्योगपतियों को फायदा होगा, ऐसा नहीं है। कानून के मुताबिक किसान और कंपनियों के बीच जो करार होगा, वो सिर्फ फसल का होगा, इसलिए किसानों इस कानून का स्वागत करना चाहिए। 

किसानों का आंदोलन करना किस हद तक सही है? 

देखिये, जब कानून किसान के विरोध में नहीं है तो किसानों का आंदोलन करना सही नहीं है, क्योंकि इस आंदोलन को कुछ राजनीतिक पार्टियां हवा देने का काम कर रही हैं। यह आंदोलन कानून के विरोध में नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में विरोध करने के लिए शुरू है। आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के कुछ फीसदी ही किसान शामिल हैं, इससे यह स्पष्ट दिखाई पड़ता है कि यह आंदोलन कानून के विरोध में नहीं, बल्कि मोदी के विरोध में शुरू किया गया है। कानून के विरोध में एक दिन का बुलाए गए भारत बंद में कौन थे, यह राज्य और देश की जनता ने देखा है। 

किसानों के आंदोलन से भाजपा और आपके संगठन को कितना फर्क पड़ेगा? 

जी कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि जनता और किसान सब जानते हैं। राज्य की पिछली देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली महायुति की सरकार के दौरान किसानों ने अपनी सब्जियों को बेचने के लिए मुंबई में आयोजित मार्केट का स्वागत किया था। इस नए कानून का अनुभव अभी किसानों को नहीं है, लेकिन इसी तरह तीन और चार साल तक अगर किसान काम करते रहेंगे तो खुशहाल रहेंगे और किसान हमेशा भाजपा का ही समर्थन करेंगे। इसी आशंका के कारण विपक्षी किसानों को भड़काने का काम कर रहे है। 

कोरोना काल के दौरान सरकार द्वारा किए गए कामों से आप संतुष्ट है? 

देखिये, देश के किसी भी राज्य की तुलना में महाराष्ट्र में सर्वाधिक कोरोना संक्रमित पाए गए। साथ ही मरीजों की मृत्यु भी अन्य राज्यों की तुलना में अधिक हुई है, लेकिन सरकार ने विज्ञापन के माध्यम से मॉस्क पहनने हाथ धोने और सोशल डिस्टेंसिंग की जागरूकता फैलाने के अलावा कुछ काम नहीं किया। क्या सरकार को यह मालूम नहीं था कि राज्य में गरीब और सामान्य जनता का इलाज अस्पताल में नहीं हो पा रहा है। मुंबई सहित पूरे राज्य में लाखों से अधिक संख्या में लोग बेरोजगार हो गए हैं, जिसे लेकर सरकार ने कोई कदम अभी तक नहीं उठाए है। शासन और प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिला। पूरे लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकार अभिनेत्री कंगना रनौत, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत जैसे मुद्दों पर सिर्फ बयानबाजी करने के काम किया, लेकिन जरूरत मंद लोगों के लिए कुछ काम नहीं किया। 

राज्य में कोरोना को लेकर विकट परिस्थिति है, इसे लेकर आप क्या कहेंगे ? 

सबको मालूम पड़ गया है कि कोरोना काल के दौरान राज्य सरकार ने किसानों और आम जनता के लिए कुछ काम नहीं किया है। पूरे लॉकडाउन के समय भारी नुकसान होने के बावजूद किसान अपने खेतों में काम कर रहा था, लेकिन सरकार ने उनकी कोई मदद नहीं की। अपने जीवन यापन के लिए किसानों ने गांव-गांव जाकर सब्जियां और आम बेचने का काम किया। लॉकडाउन के दौरान सरकार के मंत्री, सांसद और विधायक जब अपने-अपने घरों में दुबके बैठे थे, तब किसान खेतों और बाजारों में अकेला काम कर रहा था। 

रयत क्रांति संघटना किस तरह लोगों के लिए कार्य कर रहा है ? 

रयत क्रांति संघटना के कार्यकर्ता हमेशा जनहित के कार्य में समर्पित रहते हैं, इसलिए संस्था का काम बढ़िया चल रहा है। सोमवार से कृषि कानून के समर्थन में संघटना की तरफ से एक अभियान की शुरुआत की जाएगी। इस अभियान के तहत संघटना के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिलों और गांव-गांव में जाकर किसानों से मुलाकात कर कृषि कानून की सही जानकारी देंगे, क्योंकि यह हमारा अमृत कलश है। इसको वापस करने की मांग का हम विरोध कर रहे है। कृषि कानून के समर्थन को लेकर हमारी पार्टी कई बार आंदोलन कर चुकी है। हम पिछले पांच सप्ताह से लगातार कृषि कानून के समर्थन में आंदोलन कर रहे है। 

महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यों को लेकर आप क्या कहेंगे ? 

राज्य में तीन अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों की गठबंधन की सरकार है। सरकार में शामिल शिवसेना की सोच हाईप्रोफाइल है, जबकि कांग्रेस की सोच प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा विरोधी है, वहीं तीसरी पार्टी राकांपा की सोच सामान्य और गरीब जनता की मदद करना नहीं, बल्कि पार्टी और अपनी निजी फायदा वाली है, इसलिए इस सरकार के सब कुछ ठीक नहीं चल सकता। 

हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में महायुति को मिली हार पर आपकी क्या राय है ? 

देखिये, हार-जीत चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। राज्य में विधान परिषद के छह सीटों के लिए हुए चुनाव पदवीधर और शिक्षक का चुनाव था, इसमें राज्य में जिसकी सरकार होती है, उसी को अधिक सीटें मिलती है, क्योंकि मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों को सरकार से अनुदान लेना पड़ता है। जब सत्ताधारी पार्टी के सदस्य रहेंगे तो संस्थान को अनुदान लाने में अधिक मदद मिलेगी। इस चुनाव से महायुति को आम चुनाव में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 

विपक्षी दल की भूमिका में भाजपा और उनकी सहयोगी दल क्या काम कर रहे हैं ? 

कोरोना काल के महासंकट के दौरान महायुति के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर जरूरतमंद लोगों की हर संभव मदद की। इसमें लोगों को भोजन और दवाई मुहैया कराने के साथ-साथ जिन दूध उत्पादक किसानों को दूध का उचित भाव नहीं मिल रहा था, उनके लिए आंदोलन करने का काम महायुति के कार्यकर्ताओं ने किया। 


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