मराठा आरक्षण को लेकर फैलाया जा रहा है भ्रमः चव्हाण

एसईबीसी उम्मीदवारों को कोई खतरा नहीं 


मुंबइ

न्यायालय में मराठा समाज आरक्षण का मामला विचाराधीन होने के बीच राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर एसईबीसी छात्रों को शिक्षा में प्रवेश देने का निर्णय लिया है, जिसे लेकर विपक्ष सरकार के इस निर्णय पर बार-बार सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण लेने से वैध मराठा आरक्षण खतरे में पड़ जाएगा। इस पर जवाब देते हुए मराठा आरक्षण उपसमिति के अध्यक्ष और राज्य के सार्वजनिक लोक निर्माण मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि ईडब्लूएस आरक्षण के  निर्णय को लेकर न्यायालय में मराठा आरक्षण में कोई अड़चन आएगी, लेकिन कुछ विरोधी हैं, जो समाज और जनता में इसे लेकर भ्रम और डर का माहौल फैलाने का काम कर रहे है। चव्हाण ने कहा कि सरकार ने  ऐसे सकारात्मक कदम उठाए हैं, जिससे न्यायालय के साथ-साथ विकल्पों की भी अवमानना नहीं होगी। सरकार ने 2145 उम्मीदवारों के लिए ईडब्ल्यूएस को मंजूरी दे दी है। 

चव्हाण ने कहा कि ईडब्ल्यूएस का कानून केंद्र सरकार का है। इसके लिए इस श्रेणी से आरक्षण लेते समय कुछ आय की शर्तें रखी गई हैं,  जो छात्र चयनित हैं और ईडब्ल्यूएस मानदंड में आते हैं, उन्हें यह छूट वैकल्पिक है। चव्हाण ने कहा कि जो लोग ईडब्ल्यूएस लेना चाहते हैं, उन्हें इसे लेना चाहिए, जो लोग एसईबीसी के लिए इंतजार करना चाहते हैं, उन्हें इंतजार करना चाहिए। 

बता दें कि मराठा क्रांति मोर्चा के नेता अमीर कोकाटे ने मराठा समाज आरक्षण को लेकर सरकार पर हमला बोला था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि वैध मराठा आरक्षण की हत्या की है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई रोक को हटाने की कोशिश करने के बजाय, महाविकास गठबंधन ने ईडब्ल्यूएस आरक्षण को आरक्षण देकर मराठा समाज को धोखा दिया है।


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