2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार होगी तेज

nirmala sitharaman

नई दिल्ली

बजट सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री ने लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। आर्थिक समीक्षा 2020-2021 को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में सांसदों को उपलब्ध कराया गया। इस बार कोरोना संकट की वजह से आर्थिक समीक्षा का कागजों पर प्रकाशन नहीं हुआ। आर्थिक समीक्षा के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम प्रेस कांफ्रेंस किया। सुब्रमण्यम ने हेल्थकेयर से जुड़े खर्च के महत्व को रेखांकित के लिए थ्री इडियट्स फिल्म के एक सीन का सहारा लिया। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग भारत की इकोनॉमी की बुनियादी स्थिति को नहीं दिखाती है। उन्होंने कहा कि कई संकेतक इस बात की पुष्टि करते हैं। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर ने कहा कि लॉकडाउन के बगैर भी कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर बहुत अधिक असर देखने को मिलता। लेकिन लॉकडाउन की वजह से को-ऑर्डिनेटेड रेस्पांस देखने को मिला। इससे लोगों के जीवन और आजीविका को बचाने में मदद मिली। कोविड-19 का भारत ने ज्यादा परिपक्वता और दूरदृष्टि से मुकाबला किया। भारत ने लंबे अवधि में फायदा पाने के लिए छोटी अवधि के दर्द को सहा। वी शेप की रिकवरी दिखाती है कि भारत ने कितनी परिपक्वता से इसका मुकाबला किया है। कोविड-19 लॉकडाउन को कड़ाई से लागू किए जाने से उस अवधि में निगेटिव ग्रोथ देखने को मिली,लेकिन इससे आने वाले समय में पॉजिटीव ग्रोथ देखने को मिलेगी। अनिश्चितता के समय में ऐसी नीतियां बनायी जानी चाहिए जिससे हानि को कम किया जा सके। कोविड-19 को लेकर भारत की नीति इस बात पर आधारित रही कि जीडीपी ग्रोथ एक बार फिर से आ जाएगी,लेकिन लोगों का जीवन नहीं।  इस बार इकोनॉमिक सर्वे ई-बुक के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है।  मुख्य आर्थिक सलाहकार ने इकोनॉमिक सर्वे के लिए खास तौर पर तैयार किए ऐप को लांच किया। सर्वेक्षण के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 7.7 फीसद संकुचन हुआ और अगले वर्ष में इसमें V शेप के रिकवरी की उम्मीद है। 2021-22 के वित्तीय वर्ष में GDP की वृद्धि में 11 फीसद का विस्तार नजर आ रहा है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ बजट सत्र की शुरुआत हुई। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पिछले दिनों सरकार की ओर से उठाए गए योजनाओं व उपलब्धियों के बारे में बताया।


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