कोरोना के अंत का आगाज

पीछले साल भर से दुनिया के साथ देश कोरोना के कहर का सामना कर रहा था. देश ने बड़े ही अनुशासित और संयमित माहौल में इस महामारी से दो - दो हाथा किया और भले ही हमारे यहां एक बड़ी आबादी इस महामारी से संक्रमित हुई , काफी जानें गयीं बावजूद इसके दुनिया की तुलना में हमारे देश में इसका कहर काफी काम रहा है. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह का नेतृत्व देश को प्रदान किया किया उसकी हम तो सराहना कर ही रहे हैं. पूरी दुनिया भी वाहवाही कर रही है, इस दौरान देश ने आत्मनिर्भरता का पाठ सीखा. अब इसके खात्मे की जंग शुरू हो चुकी है आज का यह अख़बार जब आप पढ़ रहे होंगे तो देश में लाखों की तादाद में लोगों को टीका लग चुका होगा.यह कोई छोटे मोटी बात नहीं है कि देश के वैज्ञानिकों ने साल भर के अन्तराल में दो - दो स्वदेशी टीके तैयार कर लिए हैं और अभी कई टीके कतार में हैं. जो जल्द ही देश और दुनिया के सामने होंगे . आज, जिस तरह इंग्लैंड अौर अमेरिका जैसे विकसित देश हमारे टीके  की मांग कर रहे हैं यह हर देशवासी की लिए फक्र की बात है, अभिमान की बात है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने पहले कार्यकाल के उषा काल से ही' मेक इन इंडिया'पर जोर देते रहे हैं और इधर कोरोना काल में तो अपने हर संबोधनों में उन्होंने स्थानीय उत्पादों को वरीयता देने और लोकल के लिए वोकल होने का नारा दिया तो हमारे वैज्ञानिकों ने भी उन्हें निराश नहीं किया और कम समय में वैक्सीन तैयार कर दुनिया को चौकाया ही नहीं यह एहसास भी करा दिया कि यदि भारत ठान ले तो कुछ भी कर सकता है. बेहतरीन उत्पाद दुनिया से कहीं सस्ते कीमत पर उपलब्ध करा सकता है, तो आइये, इस नयी सफलता और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता का जश्न मनाएं और उस संकल्प को और मजबूत करें कि दुनिया में Òमेक इन इंडियाÓ का डंका जो आज बजना शुरू हुआ है वह उत्तरोत्तर और तेज हो और उद्यम के हर क्षेत्र में दुनिया हमारी क़ाबलियत का लोहा माने. यह सफलता उन विरोधियों के लिए तमाचा है, जो अपनी राजनीतिक स्वार्थों के लिए देश की उपलब्धियों में भी मीन मेख निकालने से बाज नहीं आते साथ ही अफवाह फैलाकर ही अपना जीवन सार्थक मानने वालों को भी उनका समुचित जबाब मिल गया है. जिस तरह शनिवार को नामचीन चिकित्सकों ने खुद आगे बढ़ कर सबसे पहले टीका लगवाया वह अफवाह की रोटी खाने वाले और ओछी राजनीति पर उतरे नेताओं दोनों की आंख खोलने वाला साबित होगा. कम से कम नकारात्मकता के प्रतीक ऐसे तत्वों को अब तो बाज आ जाना चाहिए. रही बात आम आवाम की तो उसे अब भी कोरोना से बचने के उन सभी मापदंडों का उसी तरह अनुपालान करना है, जैसा अब तक करते आये हैं. कारण जिस व्यक्ति को टीका लग रहा है, उसे दो बार टीका लगना है और दोनों टीकों के बीच लगभग महीने भर का अंतराल है. दोनों चरणों के टीके लगने के दो हप्ते बाद व्यक्ति में वांछित  इम्युनिटी विकसित होगी. इन सबके चलते हर्ड इम्युनिटी विकसित होने में समय लगेगा, तब तक कोई भी लापरवाही , किसी भी नागरिक की अोर से नहीं होनी चाहिए. जबकि टीका आ गया है , लड़ाई अंतिम दौर में प्रवेश कर चुकी है. हमें वही संयम और अनुशासन का परिचय देना है, जो इसके शुरूवात से अब तक देते आये हैं. हम से बहुत विकसित राष्ट्र दुबारा लॉक डाउन कर रहे हैं, कर्फ्यू लगा रहे हैं. हमें वैसी नौबत पुन: नहीं आने देना है . हमने बहुत सब्र से सब झेला है, थोड़ी लड़ाई और बची है कोई लापरवाही ना हो और महामारी को फिर मुंह उठाने का मौक़ा ना मिले.  इसमें ही सबका भला है , हम जितनी जल्दी कोरोना को अपने बीच से विदा करेंगे, उतना जल्दी ही देश का जनजीवन समान्य होगा. वैक्सीन निर्माण के शुरूआत से ही निहित स्वार्थी राजनीतिक तत्वों और अफवाह बहादुरों द्वारा लगातार इस पर उंगली उठाई जाती रही है। इससे जरा भी विचलित न होते हुए वैक्सीन बनाने के काम में लगे वैज्ञ​ानिकों और कंपनियों ने जिस सूझबूझ और संयम के साथ वैक्सीन बनाने के काम को अपने अंजाम तक पहुंचाया, इसलिए वे साधुवाद की पात्र हैं। हमने उक्त नकारात्मक शक्तियों और दुनिया को अपना दमखम दिखा दिया है और मोदी युग में भारत की धमक जिस तरह दुनिया में बढ़ी है। उस पर और चार चांद लगा दिया है। यह पूरे देश के लिए गौरव की बात है।


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