गुटखा बेचने वालों की सजा बरकरार

विक्रेताओं को न्यायालय का झटका

aurrangabad highcourt

मुंबइ

सर्वोच्च न्यायालय ने गुटखा बेचने वाले के खिलाफ 10 साल की सजा को बरक़रार रखा है। राज्य में गुटखा बेचने पर सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदी को बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ में चुनौती देने गुटखा विक्रेताओं को फटकार लगाते हुए न्यायालय ने सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। न्यायालय ने गुटखा बेचने वालों पर 10 साल की सजा को बरकरार रखा है। गुटखा बेचने वाले के खिलाफ कारवाई को लेकर औरंगाबाद खंडपीठ के निर्णय पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई स्थगित को देखते हुए राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री डॉ राजेंद्र शिंगणे ने पहल करते हुए नवंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट में एक स्वतंत्र राय याचिका दायर की, जिसमें  उन्होंने न्यायालय से कहा कि गुटखा बेचने वाले आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और धारा 328 लगाना आवश्यक है। जिसकी सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने गुटखा विक्रेता अब 10 साल की सजा को बरकरार रखा। राज्य में गुटखा, पान मसाला, सुगंधित तंबाकू, सुगंधित अरेका अखरोट और इसी तरह की अन्य वस्तुओं को खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा 2012 से खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के प्रावधानों के अधीन प्रतिबंधित कर दिया गया है। वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि इन प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के सेवन से मुंह का कैंसर और अन्य गंभीर शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं। इस संबंध में कई शोध किए गए हैं और उनके द्वारा प्रकाशित शोध पत्रों में उनका उल्लेख बड़े पैमाने पर किया गया है। 


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