मलेशिया में फिर इमरजेंसी

कुआलालंपुर

मलेशिया के नरेश ने कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए आपातकाल पर मुहर लगा दी है। इस कारण अगस्त महीने तक मलेशिया की संसद निलंबित रहेगी। आपातकाल के ऐलान के बाद से जबरदस्त विरोध झेल रहे प्रधानमंत्री मुहयिद्दीन यासीन को पद से हटाने के लिए आम चुनाव करवाने के सभी प्रयासों पर रोक लग जाएगी। इससे पहले मलेशिया में 1969 में आपातकाल की घोषणा हुई थी जब नस्ली दंगों में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। मलेशिया नरेश द्वारा आपातकाल की घोषणा को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। इससे पहले नरेश सुल्तान अब्दुल्ला अहमद शाह ने अक्टूबर में मुहयिद्दीन के आपातकाल घोषित करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। एक दिन बाद ही मलेशिया के सबसे बड़े शहर कुआलालंपुर, प्रशासनिक राजधानी पुत्रजया और पांच अत्यंत जोखिम वाले शहरों में लाखों लोग दो सप्ताह के लिए लगभग लॉकडाउन जैसी स्थिति का सामना करेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब सत्तारूढ़ गठबंधन में सबसे बड़े दल यूनाइटेड मलय नेशनल ऑर्गेनाइजेशन ने मुहयिद्दीन से समर्थन वापस लेने की धमकी दी है ताकि समय से पहले आम चुनाव कराए जा सकें।

संसद और राज्य विधानसभाए रहेंगी निलंबित

मुहयिद्दीन ने कहा है कि देश की संसद और राज्य विधानसभाएं निलंबित रहेंगी और आपातकाल में किसी चुनाव की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि महामारी से राहत मिलने पर, जब चुनाव कराना सुरक्षित होगा तब वह आम चुनाव कराएंगे।


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