अब अण्णा नहीं करेंगे अनशन

फड़नवीस ने अण्णा हजारे को मनाया

Anna Hazare

मुंबई

सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ शनिवार से अपने गांव रालेगांव सिद्धि में अनिश्चितकालीन अनशन को वापस ले लिया है। शुक्रवार को केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की उपस्थिति में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में अण्णा हजारे ने अनशन वापस लेने की घोषणा की। अण्णा हजारे ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों ने हित में फैसलों को देरी से स्वीकार किया। इस पर केंद्र सरकार ने उच्चाधिकार समिति स्थापित कर जल्द ही निर्णय लेने का वादा किया है। यह आश्वासन मिलने के बाद मैं अपना नियोजित उपवास वापस ले रहा हूं। इस दौरान देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि हमने अण्णा हजारे की मांगों को स्वीकार करने का वादा किया है। हम स्वीकार करते हैं कि उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्णय में देरी हुई है। अण्णा की मांगों को सुनने के बाद मैं और गिरीश महाजन दिल्ली गए थे। हमने केंद्र सरकार के समक्ष अण्णा की मांगें रखीं। 

फड़नवीस ने कहा कि उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्णय गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया। फड़नवीस ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री इस उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति में नीति आयोग के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। साथ ही अण्णा हजारे द्वारा सुझाए गए व्यक्तियों को इस समिति में शामिल किया जाएगा। समिति अगले छह महीनों में निर्णय लेगी और इसे लागू करेगी। बता दें कि सात बैठकों के बाद भाजपा अण्णा हजारे को भूख हड़ताल पर जाने से रोकने में सफल रही है। इससे पहले भाजपा के छह बार प्रयास विफल रहे थे। भाजपा नेताओं ने अण्णा को भूख हड़ताल पर जाने से रोकने की भरसक कोशिश की। भाजपा विधायक गिरीश महाजन ने गुरुवार को छठीं बार अण्णा हजारे से मुलाकात की और उन्हें मनाने की कोशिश की। दिल्ली में बैठक का एक प्रारूप अण्णा को भी दिया गया था हालांकि, अण्णा उपवास पर अड़े थे। इसके पहले अण्णा हजारे ने घोषणा की थी कि वे केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ शनिवार को महाराष्ट्र में अपने गांव रालेगांव सिद्धि में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा था कि मैं कृषि क्षेत्र में सुधारों की मांग करता रहा हूं, लेकिन केंद्र सही फैसले लेते नहीं दिख रहा है। हजारे ने कहा था किसानों को लेकर केंद्र कतई संवेदनशील नहीं है, इसीलिए मैं 30 जनवरी से अपने गांव में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर रहा हूं।


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