...तो बेबी होगा खुशिमजाज!


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ग्नेंसी के दौरान महिलाओं को अलग-अलग पलों का अहसास होता है। ऐसे में उसे अपनी खास देखभाल रखनी पड़ती है। ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे का बेहतर तरीके से विकास हो पाएं। असल में, मां की भावनाओं व डेली रूटीन का बच्चे पर पूरा असर होता है। इससे उसका बेहतर विकास होने में मदद मिलती है। ऐसे में आज हम इस आर्टिकल में कुछ टिप्स बताते हैं। इनकी मदद से गर्भवती महिलाओं को गर्भ में पल रहे शिशु को खुश रखने में मदद मिलेगी। 

शांत संगीत सुनें

किसी भी तरह की आवाज व शोर बच्चे को पूरी तरह से प्रभावित करती है। ऐसे में गाने सुनने से बच्चे की धड़कनें कम और ज्यादा होने लगती हैं, इसलिए जरूरी है कि मां शांत व मीठे संगीत सुनें। इससे बच्चे को खुशी मिलने के साथ शारीरिक व मानसिक विकास होने में मदद मिलेगी। मगर ज्यादा तेज आवाज और करके गाने सुनने से बचें। नहीं तो गर्भ में पल रहा बच्चा डर सकता है। 

हंसने वाले प्रोग्राम या फिल्में देखें

गर्भावस्था के दौरान महिला का खुश रहना बेहद जरूरी है। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहने से दिल स्वस्थ रहता है। रिसर्च के अनुसार, इस समय हंसने वाले प्रोग्राम या फिल्में देखने से बच्चे पर इसका पॉजीटिव असर होता है। 

साथ ही मां के हंसने पर गर्भ में पल रहा बच्चा भी उछलता है। ऐसे में मां द्वारा किए काम व उसकी भावनाएं बच्चे से खासतौर अपना प्रभाव डालती है। 

​कहानी सुनाना भी सही

शायद आपको सुनने में अजीब लगेगा पर गर्भ में शिशु बाहर होने वाली सभी गतिविधियों को सुनता है। ऐसे में वह मां की धड़कनों को सुनने के साथ उसकी भावनाओं को अच्छे से समझता है। ऐसे में मां को बच्चे से बातें करनी चाहिए। मगर आपको समझ ना आए कि शिशु के क्या बात करें तो ऐसे में उसे कहानी सुनना भी सही रहेगा। ऐसे में सकारात्मक और मोटिवेशन वाली कहानी सुनाएं। 

पेट की हल्के हाथों से मसाज करें

मसाज करवाने से शरीर में हल्का व रिलैक्स फील होता है। साथ ही इससे बच्चे को भी अच्छा लगता है। िवशेषज्ञ के अनुसार गर्भावस्था में मां को अपने पेट की हल्के हाथों से मसाज करनी चाहिए। इससे बच्चे को मां का स्पर्श फील होने के साथ दिमाग का तेजी से विकास होने में मदद मिलती है। 

​पापा करें बातें

गर्भ में पल रहे शिशु के लिए मां और बाप दोनों ही अहम होते हैं। ऐसे में पिता को भी बच्चे से बातें करनी चाहिए। इसके लिए अपने पति का हाथ अपने पेट पर रख कर उन्हें शिशु से बातें करने को कहें। इससे बच्चा अच्छा व खुशी महसूस करेगा। साथ ही गर्भ में होते हुए भी वह अपने पेरेंट्स से जुड़ा रहेगा।


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