यह राजनीति नहीं कुनीति है

पता नहीं अखिलेश यादव ने किस इरादे से वैक्सीन को लेकर बेतुका बयान दिया लेकिन यदि उनके निशाने पर मुस्लिम समाज है तो उन्हें पता होना चाहिए कि एक तो वह जागरूक हो चुका है और दूसरे कई इस्लामी देशों में टीकाकरण का कार्यक्रम शुरू हो चुका है।

 इससे खराब बात और कोई नहीं हो सकती कि जिस दिन कोरोना वायरस से उपजी महामारी कोविड-19 रोधी वैक्सीन लगाए जाने के लिए देश भर में पूर्वाभ्यास हो रहा था, उसी दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यह गैर जिम्मेदाराना बयान दिया कि वह वैक्सीन नहीं लगवाने वाले, क्योंकि वह भाजपा की है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह व्यर्थ का बयान केवल सेहत को लेकर की जाने वाली सस्ती राजनीति ही नहीं, बल्कि उन वैज्ञानिकों का अपमान भी है, जिन्होंने अथक मेहनत से वैक्सीन तैयार की है। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि अखिलेश यादव ने यह बयान इस तथ्य से भली तरह परिचति होने के बाद भी किसी संकीर्ण राजनीतिक इरादे के तहत जान-बूझकर दिया कि देश में जो वैक्सीन तैयार हो रही हैं, उनका भाजपा से कोई लेना-देना नहीं। नि:संदेह अखिलेश या उनकी जैसी सोच वाले लोगों को यह अधिकार है कि वे वैक्सीन लगवाने से इन्कार दें, लेकिन इसका कहीं कोई मतलब नहीं कि वे उसे किसी दल विशेष की दवा करार देकर लोगों को गुमराह करें। आपत्तिजनक केवल यह नहीं कि उन्होंने वैक्सीन को भाजपा की करार दिया, बल्कि यह भी है कि उसके प्रति अविश्वास जताकर लोगों के मन में संदेह पैदा करने का काम किया। उनका बयान पोलियो उन्मूलन अभियान के समय उन दकियानूसी लोगों के बयानों की याद दिला रहा है, जिन्होंने भोले-भाले और अशिक्षति लोगों को गुमराह करने का काम किया था।

 क्या इससे बड़ी विडंबना और कोई हो सकती है कि जिन युवा एवं शिक्षति नेताओं से समाज को दिशा दिखाने और उसे जागरूक करने की अपेक्षा की जाती है, वे ठीक इसके उलट काम कर रहे हैं? अखिलेश यादव के बयान से यही पता चलता है कि राजनीतिक उल्लू सीधा करने के फेर में कोई किस हद तक जा सकता है। यदि वह वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिकों की प्रशंसा में दो शब्द नहीं कह सकते थे और टीकाकरण अभियान की तैयारियों पर कुछ नहीं कहना चाहते थे तो कम से कम उन्हें लोगों के मन में शक के बीज पैदा करने का काम तो नहीं ही करना चाहिए था। चूंकि देश पोलियो उन्मूलन अभियान वाले दौर से आगे बढ़ चुका है इसलिए यह उम्मीद की जाती है कि खुद समाजवादी पार्टी के समर्थक भी अखिलेश यादव के बयान पर गौर नहीं करेंगे। पता नहीं अखिलेश यादव ने किस इरादे से वैक्सीन को लेकर बेतुका बयान दिया, लेकिन यदि उनके निशाने पर मुस्लिम समाज है तो उन्हें यह पता होना चाहिए कि एक तो वह जागरूक हो चुका है और दूसरे, कई इस्लामी देशों में भी टीकाकरण का कार्यक्रम शुरू हो चुका है। इसे राजनीति नहीं कुनीति कहते है।

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