जीएसटी, ब्याज की कमाई से बची मनपा की साख

BMC

मुंबई

कोरोना काल में भी मनपा की तिजोरी में कुल कमाई का 41 प्रतिशत हिस्सा अब तक जमा हो चुका है। मनपा को जीएसटी से मिलने वाला पैसा और बैंकों में फिक्स जमा हुए पैसों के मिले ब्याज से मनपा की तिजोरी में कुछ हद तक घाटे का भार कम हुआ है। मनपा की तिजोरी में पैसे भले ही जमा हुए हो, लेकिन कमाई करने वाले मुख्य स्रोत में अभी तक मात्र 20 प्रतिशत ही कमाई हुई है।

उल्लेखनीय हैं कि कोरोना काल में एशिया की सबसे बड़ी और धनी महानगर पालिका भी अछूती नहीं रह पाई है। मनपा की तिजोरी में दिसंबर आखिरी तक कुल कमाई का 41 प्रतिशत हिस्सा जमा हुआ है। अभी आर्थिक वर्ष पूरा होने में तीन महीने और शेष बचे है और तिजोरी में और कितना पैसा जमा होता है, इसे लेकर मनपा अधिकारियों को चिंता सताने लगी है। मनपा प्रशासन का विभिन बैंकों में जमा हुए पैसों से मिलने वाला ब्याज और चुंगी बंद हो जाने के बाद मनपा को राज्य सरकार से मिलने वाला अनुदान ही राहत बना हुआ है। मनपा की कमाई का कुल हिस्सा से लगभग एक तिहाई हिस्सा जीएसटी से मिल रहा है। राज्य सरकार से अनुदान मिलने के कारण मनपा की तिजोरी में कुछ हद तक पैसे जमा हुए और तिजोरी खाली नहीं हुई । इसी तरह मनपा के विभिन्न बैकों में जमा लगभग 80 हजार करोड़ का मिलने वाले ब्याज से मनपा की तिजोरी और भर गई, लेकिन मनपा के कमाई के मुख्य स्रोत में भारी गिरावट हुई है। जीएसटी से मिलने वाला पैसा अगले दो साल बाद बंद हो जाएगा, उसके बाद मनपा को मुंबई की जनता को सेवा सुविधा देने में भारी जहमत उठानी पड़ेगी। मनपा को अभी कोरोना काल में ही लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बैकों में जमा रखे पैसों को निकालना पड़ा। मनपा को फिक्स डिपॉजिट से 1200 करोड़ रुपया निकलना पड़ा। मनपा अधिकारी कमाई के स्रोत को सही रूप से वसूलने में ध्यान नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं होगा, जब बेस्ट की तरह मनपा भी आर्थिक तंगी से जूझने न लगे।

चुंगी बंद होने के बाद मनपा की कमाई का मुख्यस्रोत प्रॉपर्टी टैक्स और विकास नियोजन विभाग सहित पानी के बिल और सीवरेज से होने वाली कमाई बने हुए हैं। कोरोना काल में आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों और सरकार के आपस में सामंजस्य नहीं होने के कारण मनपा की कमाई घटती ही जा रही है। जिसका खामियाजा मनपा को आने वाले कुछ सालों में भुगतना पड़ सकता है। चुंगी बंद होने के बाद राज्य सरकार से मिल रहे जीएसटी का अनुदान अब अगले दो साल तक ही मिलेगा।


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