पुलिस चाहती तो न गैंगरेप होता, न पीड़िता की जान जाती : महिला आयोग

 बदायूं

गैंगरेप घटना ने लोगों को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। रेप के साथ ही पीड़िता के साथ जिस तरह की दरिंदगी हुई, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाली है। इस बीच गुरुवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी बदायूं पहुंची। उन्‍होंने पीड़िता के परिवार से मुलाकात से पहले एसएसपी के साथ बैठक कर पूरे मामले की जानकारी ली।  इसके बाद उन्होने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और दु:ख-दर्द सुना। वहां से वह घटना स्थल पर पहुचीं। लोगों और अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। उन्होने कहा कि पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही हुई है। जिसकी वजह से महिला के साथ दरिंदगी हुई है। अगर पुलिस चाहती तो घटना व महिला की जान बच सकती थी। उघेती की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसमें हम पुलिस की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हैं। कहा कि अगर पुलिस चाहती तो महिला की जान बच सकती थी और घटना होने से भी बच सकती थी, लेकिन पुलिस हादसा दिखाने के लिए लीपापोती करती रही। महिला 18 घंटे पड़ी रही। पुलिस ने एफआईआर लिखने में देरी की। महिला को जिला अस्पताल समय से नहीं पहुंचाया। आरोपियों पर समय से करवाई नहीं की गई। जिसकी वजह से इतनी बड़ी घटना हो गई। पुलिस की सक्रियता होती तो इतनी बड़ी और दरिंदगी वाली घटना नहीं होती। कहा कि महिलाओं को लेकर सरकार तो गंभीर है। मिशन शक्ति जैसे अभियान भी चल रहे हैं मगर इसका इन दरिंदों पर कोई असर नहीं है। भले ही ऐसे मामलों में कार्रवाई होती है मगर फिर भी घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है।


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