चीन, पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने के लिए रक्षा बजट बढ़ाए जाने की जरूरत

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नई दिल्ली

चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी गतिरोध को देखते हुए एक्सपर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021-22 के केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाए जाने की जरूरत पर बल दिया है। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने इस बात को भी प्रमुखता से रेखांकित किया है कि सरकार को डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए। मेजर जनरल एसपी सिन्हा ने कहा कि दुनिया ऐसे देशों के सामने ही झुकती है, जो शक्तिशाली होते हैं। ऐसे में भारत को डिफेंस सेक्टर में खुद को मजबूत और शक्तिशाली बनाने की जरूरत है और इसके लिए आगामी बजट से काफी अधिक उम्मीदें हैं। सिन्हा ने कहा कि आगामी बजट में सेना के आधुनिकीकरण को ध्यान में रखकर घोषणाएं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की सेनाओं को अत्याधुनिक हथियार, नई टेक्नोलॉजी से लैस मॉनिटरिंग सिस्टम और प्लेटफॉर्म्स की दरकार है। इसके साथ ही सेना को अथॉराइज्ड हथियार चाहिए। इसका आशय यह है कि जितने हथियार और प्लेटफॉर्म्स का ऑथराइजेशन मिला हुआ है। वह मात्रा पूरी होनी चाहिए। इसके लिए आवंटन में वृद्धि की जरूरत है। साथ ही क्वालिटी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। सिन्हा ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को इस तरह के कदम उठाने चाहिए ताकि आने वाले समय में हम रक्षा क्षेत्र में दूसरे देशों को हथियारों का निर्यात कर पाएं। उन्होंने कहा कि एक्सपोर्ट की क्षमता विकसित होने से भारत एक राष्ट्र के तौर पर काफी मजबूत होकर उभरेगा। वहीं, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने कहा कि चीन से जुड़ी चुनौती गंभीर होती जा रही है और इस चीज से निपटने के लिए रक्षा बजट बढ़ाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रक्षा बजट को देश की कुल जीडीपी के 2.5 फीसद तक बढ़ाए जाने की जरूरत है। हालांकि, आर्थिक सुस्ती और कोरोना महामारी की वजह से ऐसा करना थोड़ा मुश्किल प्रतीत हो रहा है लेकिन रक्षा बजट को यथासंभव बढ़ाया जाना चाहिए। इससे चीन और पाकिस्तान को कड़ा संदेश मिलेगा। उन्होंने साथ ही कहा कि रक्षा क्षेत्र से जुड़े बुनियादी ढांचे को सबसे ज्यादा तवज्जो दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। उन्होंने सशक्त भारत के लिए इसे जरूरी करार दिया। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन को छह फीसद की वृद्धि के साथ 3.37 लाख करोड़ रुपये किया था।


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