निराधार अफवाह फैलाना अक्षम्य पातक है

देश के महाऔषध नियंत्रक की हरी झंडी के साथ ही जहां अब देशव्यापी कोरोना रोधी टीकाकरण की तैयारियां तेज हो गयी है और संकेत हैं कि संक्रांति के आसपास देश में टीका करण शुरू हो जाएगा, वहीं दूसरी ओर इस पर भी राजनीतिक रोटियां सेंकने, धार्मिक गुरु या मौलानाओं द्वारा वैक्सीन पर सवाल खड़े करने व अफवाह फैलाने का काम भी तेज हो गया है. यह किसी विडंबना से कम नहीं है. हमारे देश के वैज्ञानिकों ने रेकार्ड समय में देश में दो-दो वैक्सीन बनाने का कीर्तिमान बनाया है, जो देश के हर नागरिक का सीना फक्र से ऊंचा करने वाला है. इस पर देश और दुनिया में हमारी वाहवाही हो रही है. विश्व  स्वास्थ्य संघठन जैसे  संस्थान हमारी सराहना कर रहे हैैं, और हमारे सपाई व कांग्रेसी नेता इसमें भी मीन-मेख निकालकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकनें में लगे है. यह सर्वथा अनुचित, असामाियक और निंदनीय होने के साथ-साथ किसी भी जिम्मेदार विपक्ष के लिए अशोभनीय भी है. यह ओछी राजनीति है. कारण कोरोना कहर ने िजस तरह जन-जीवन पंगु बनाया हुआ है, लगता है इसका भान भी इन नेताओं को नही है. राजनीति करने की भी अपनी एक मर्यादा है. यह आपदा का समय है, इसमें सबको मिल-जुलकर इस तरह काम करने की जरूरत है, जिससे लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन प्राप्त हो. काफी शोध -परीक्षण और मेहनत-मशक्कत के बाद वैक्सीन तैयार हुई है, यह देश के लिए गर्व का क्षण है. यह जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचे इसके लिए केंद्र सरकार प्रयत्न की पराकाष्ठा कर रही है. लोगों में आशंका का बीजारोपण करना एक ऐसा पातक है जिसकी कोई माफी है, ऐसा नहीं लगता. इसलिए ऐसे बयान बहादुर धर्मगुरु और राजनेता दोनों अपनी नकारात्मक गतिविधियों से बाज आयें. हाँ कुछ गलत हो, अनुचित हो तो जरूर आवाज़ उठायें. सिर्फ सत्तारूढ़ दल की कमी निकालना है इसलिए कुछ भी बयान दे देना यह उन्हें कोई फायदा पहुंचाएगा ऐसी ग़लतफहमी न पालें, ऐसे कृत्यों से नुकसान ही होता है.


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