कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी भाषी इलाकों को लेकर रहेंगे : सीएम

महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद फिर गरमाया

Uddhav Thackeray

मुंबइ

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि प्रदेश सरकार कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी भाषी बहुल इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करने के लिए कटिबद्ध है। रविवार को मुख्यमंत्री ने कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद की लड़ाई में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में शामिल होने के लिए प्राण देने वाले शहीदों को विनम्र अभिवादन करता हूं। कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी भाषी और सांस्कृतिक इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करना ही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इसलिए हम लोग इसके लिए एकजुट और प्रतिबद्ध हैं। 

प्रदेश के नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल किए बिना हम लोग शांत नहीं बैठेंगे। शिंदे ने कहा कि सरकार सीमा विवाद को निपटाने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रही है। शहीदों को नमन करने के लिए बेलगाम जाने के लिए निकले प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री राजेंद्र पाटील-यड्रावकर को कर्नाटक पुलिस ने राज्य की सीमा पर रोक लिया। उन्होंने कहा कि मैं पिछले साल जैसे-तैसे छिपकर कर्नाटक के बेलगाम में पहुंच गया था, लेकिन इस बार कर्नाटक पुलिस ने मुझे सीमा पर रोक लिया है। मैं कर्नाटक सरकार की निंदा करता हूं। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के मराठी भाषी बहुल सीमावर्ती बेलगाम, कारवार और निप्पनी पर महाराष्ट्र का दावा है। इस कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच कई सालों से सीमा विवाद की लड़ाई जारी है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में प्रलंबित है।

...तब होगी शहीदों की सच्‍ची श्रद्धांजलि

उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कर्नाटक के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले सभी मराठी भाषी गांवों, बेलगाम, कारवार, बीदर और भालकी को एकजुट कर महाराष्ट्र में शामिल करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब तक कर्नाटक से अंतिम मराठी गांव महाराष्ट्र नहीं पहुंच जाता है, तब तक सीमा युद्ध के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि नहीं होगी। शहीद दिवस पर शहीदों को याद करते हुए अजीत पवार ने उन्हें अभिवादन किया। 

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 1956 में इसीदिन, बेलगाम, कारवार, बीदर जैसे मराठी गांव अन्यायपूर्ण तरीके से तत्कालीन मैसूर राज्य में प्रवेश कर गए थे। सीमावर्ती क्षेत्रों में मराठी भाइयों का संघर्ष और उस समय के महाराष्ट्र राज्य के साथ हुए अन्याय को दूर करने के लिए अनवरत प्रयास जारी है। जब तक यह लड़ाई सफल नहीं होती, सभी मराठी भाई एकता के साथ लड़ेंगे।

सीमा विवाद का इतिहास 

गौरतलब हो कि 18 जनवरी 1956 को मुंबई में एकजुट महाराष्ट्र के लिए लड़ रहे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गयी थी, जिसमें प्रदेश के दस लोग शहीद हुए और दो सौ से अधिक लोग घायल हुए थे। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने उन महाराष्ट्र नायकों को श्रद्धांजलि दी जो संयुक्त महाराष्ट्र के लिए शहीद हुए थे। उन्होंने घायल सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। 


Labels:

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget