60 लाख लोगों को नहीं मिला पीएफ पर ब्याज

EPFO

नई दिल्ली

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन  के लगभग 60 लाख सब्सक्राइबर्स को अब तक ब्याज का पैसा नहीं मिला है। जबकि सरकार ने 2019-20 के ब्याज का भुगतान 1 से डेढ़ महीने पहले ही करना शुरू कर दिया था। EPFO के अनुसार ब्याज के भुगतान में ये देरी KYC में गड़बड़ी के कारण हो रही है। कर्मचारी और नियोक्ता (एंप्लॉयर) द्वारा दी गई जानकारी आपस में मैच न होने के कारण ये स्थिति बनी है।

EPFO ने साल 2019-20 के लिए 8.5% ब्याज इस साल की शुरुआत से देना शुरू किया था। अब तक करीब 5 करोड़ खातों में ब्याज की राशि पहुंचा दी गई है। EPFO के पास कुल 6 करोड़ सब्सक्राइबर हैं। आम तौर पर ब्याज के भुगतान की प्रक्रिया 1 से 2 सप्ताह में पूरी हो जाती है।

EPFO संस्थागत रूप से ब्याज का भुगतान करता है न कि इंडिविजुअल पर्सन के आधार पर। अगर संस्था के एक भी कर्मचारी की जानकारी सही नहीं पाई जाती है तो पूरी संस्था के कर्मचारियों को ब्याज के भुगतान में देरी होती है। इस साल कई संस्थाओं को इसी चलते भुगतान में समय लग रहा है।

सरकार ने सितंबर में दो किस्तों में ब्याज का भुगतान करने की बात कही थी। पहली किस्त के तहत 8.15% ब्याज दिया जाना था। बाकी का 0.35% ब्याज 31 दिसंबर 2020 तक दिया जाना था।

EPF पर वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 8.50% ब्याज तय किया गया है। जो बीते 7 सालों में सबसे कम है। वित्त वर्ष 2018-19 में EPF या PF पर 8.65% ब्याज दिया गया था। 

किस साल कितना ब्याज मिला

नियमों के मुताबिक, सैलरी पाने वाले लोगों को अपने वेतन और महंगाई भत्ते की 12% रकम PF खाते में योगदान करना अनिवार्य होता है। नियोक्ता भी कर्मचारी के PF अकाउंट में इतना ही योगदान देता है। हालांकि, कंपनी का हिस्सा दो हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें से 8.33% पेंशन स्कीम में जाता है। वहीं, बाकी हिस्सा PF खाते में जाता है। PF अकाउंट में योगदान किए गए अंश पर कम्पाउंडिंग के आधार पर सालाना ब्याज मिलता है।


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