बिजली बिल को लेकर गरमाई सियासत

सरकार के लिए जनता की अपेक्षा शराब महत्वपूर्ण : पाटिल

chandrakant patil

मुंबइ

राज्य में बिजली बिल को लेकर एक बार से फिर राजनीति गरमा गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। लॉकडाउन के दौरान ग्राहकों के बाकी बिजली बिल को वसूलने के लिए बिजली कंपनियों ने मुहिम शुरू किया है। इसके तहत बिल न भरने वाले ग्राहकों के कनेक्शन काटे जा रहे हैं। जिसे लेकर राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार पर भाजपा आक्रामक हो गई है।

रविवार को ट्वीट के माध्यम से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान शराब ब्रिक्री पर लगने वाले शुल्क में सरकार ने 50 फीसदी छूट देने का निर्णय लिया, लेकिन बिजली उपभोक्ताओं को बिल में छूट देने में क्या अड़चनें पैदा हो रही हैं, सरकार को इस बारे में जनता को बताना चाहिए। पाटिल ने आगे कहा कि सरकार के लिए जनता की तुलना में शराब महत्वपूर्ण है क्या? सरकार राज्य की जनता से माफ़ी मांगते हुए निर्णय को वापस ले। बिल न भरने वाले लोगों का कनेक्शन काट दिया जा रहा है, जो राज्य की सामान्य जनता के साथ अन्याय है। पाटिल ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने ताज होटल के लगभग 10 करोड़ का दंड माफ कर दिया है, लेकिन गरीबों के बिजली के बिल में क्यों छूट नहीं दे रही है। सरकार ने अपनी कलंकित छवि को सुधारने के लिए छह करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन आम जनता के बढ़कर आए बिजली में छूट क्यों नहीं दे रही है। भाजपा के साथ सत्ताधारी की सहयोगी स्वाभिमानी शेतकरी संगठना के नेता राजू शेट्टी ने भी सरकार पर हमला बोला है। उन्होने बिजली कंपनियों को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर हिम्मत है तो लोगों के बिजली कनेक्शन काटकर दिखाए। शेट्टी ने आगे कहा कि राज्य सरकार के पास पैसे होने के बावजूद लोगों के कनेक्शन काटे जा रहे हैं।


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