मौत की सुरंग में जिंदगी की खोज जारी है


चमोली

प्राकृतिक आपदा के वक्त टनल में मलबे के नीचे दबे करीब 200 लोगों में से अबतक 19 लोगों को जीवित निकाला गया है, जबकि शेष लोगों को बचाने की कवायद तेजी से जारी है। मौत की सुरंग में जिंदगी की तलाश में जुटे बचावकर्मियों को विश्वास है की वे अिधकांश लोगों को सुरक्षित निकालने में सफल होंगे। यहां तपोवन टनल में सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की साझा टीम डट चुकी है। वह इस टनल में जमे मलबे को साफ करते हुए लगातार आगे बढ़ रही हैं लेकिन उन्हें कठिन चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। फिलहाल इन जवानों को पूरी उम्मीद है कि इस टनल में कोई भी जिंदगी फंसी होगी तो उसे वे सही-सलामत निकाल लेंगे।

राज्य पुलिस ने सोमवार को ट्वीट कर बताया कि अब तक अलग-अलग स्थानों से 26 लोगों के शव बरामद होने की पुष्टि हुई है। अब भी उत्तराखंड, यूपी, झारखंड, बिहार, पंजाब, पश्चिम बंगाल, नेपाल, जम्मू-कश्मीर और ओडिशा के तकरीबन 202 व्‍यक्ति लापता हैं। इनकी तलाश के लिए युद्ध स्तर पर राहत व बचाव कार्य जारी है।

NDRF के डीजी एसएन प्रधान ने बताया कि यहां पर 191 लोग मौजूद थे। इनमें से 27 जिंदा बचे हैं और 26 के शव मिले हैं। 153 लापता हैं और इन्हीं लापता लोगों में से कुछ वर्कर्स के टनल में फंसे होने की आशंका है। वहीं, उत्तराखंड पुलिस ने बताया कि पूरे चमोली की बात करें तो हादसे के बाद अब तक करीब 202 लोगों के लापता होने की खबर है।

विनाशकारी आपदा में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की निघासन तहसील के रहने वाले करीब 34 लोग लापता हैं। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, त्रासदी में लापता हुए जिले के कुल मजदूरों की संख्या 50 तक बताई जा रही है। लापता लोगों के परिजन द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के मुताबिक निघासन तहसील के इच्छा नगर गांव के 15, भैरमपुर गांव के आठ, बाबू पुरवा गांव के चार, तिकोनिया गांव के तीन और भूलनपुर, काडिया, मिर्जापुर और सिंगाही गांव के रहने वाले एक-एक मजदूर इस आपदा में लापता हैं। 


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