'सरकार किसानों से चर्चा को तैयार'

टिकैत बोले- कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं

tomar tikait

नई दिल्ली

सरकार ने लोकसभा में कहा है कि वह किसानों के मुद्दों पर सदन के भीतर और बाहर चर्चा करने के लिए तैयार है। मंगलवार को किसानों के मुद्दे को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है। 

लोकसभा में कृषि और किसान कल्याण मंत्री तोमर ने कहा कि हम किसानों के मुद्दे पर बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके लिए सदन को बिना रुकावट के चलाया जाए। अगर शोर-शराबा नहीं होता तो चर्चा शुरू हो चुकी होती।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने पिछले कई वर्षों से कृषि सुधारों के संबंध में सभी पक्षकारों के साथ वार्ता की है और नए कृषि कानूनों से जुड़े मुद्दे के समाधान के लिए सरकार एवं आंदोलनकारी किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता में कानूनों में संशोधन को लेकर सरकार ने एक के बाद एक कई प्रस्ताव रखे हैं। लेकिन किसान यूनियन के नेता अपनी जिद पर अड़े हैं। इधर भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन के दौरान नया नारा दिया है- 'कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं'। राकेश टिकैत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 18 माह कृषि कानून स्थगित करने वाले प्रस्ताव को ठुकरा दिया। 

राकेश टिकैत ने कहा है कि तीनों कानून वापस हो और एमएसपी की गारंटी मिले तभी किसान उठेंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अक्टूबर तक भी खत्म नहीं होगा।  किसानों के मंच को सियासी दलों ने हाईजैक कर लिया है। तमाम दलों के नेता आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन व्यक्त कर रहे हैं। शिवसेना नेता संजय राउत पार्टी के अन्य सांसदों के साथ मंगलवार दोपहर गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत से मुलाकात की। राउत ने कहा, जिस तरह से यहां दहशतवाद हो गया, जिस तरह से हमारे किसानों को, टिकैत साहब को कुचलने की कोशिश की गई तो हमको लगा कि हमारा कर्तव्‍य बनता है कि उनके साथ खड़े रहें। हम उद्धव ठाकरे का संदेश लेकर आए हैं। 

विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों की मौत को लेकर गृह मंत्रालय ने कहा है कि उसकी निगाह हर गतिविधि पर बनी हुई है। मंत्रालय ने कहा है कि व्यक्तिगत और सांगठनिक गतिविधियों पर केंद्र सरकार की निगाह बनी हुई है। कानून के मुताबिक आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। एक तरह से गृह मंत्रालय ने पुलिस की कार्रवाई को उचित ठहराया है।


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