बजट से आस और उम्मीद

 कोरोना महामारी के उषा काल के पहले हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से कदम ताल कर रही थी. देश पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा था. दुनिया की तरह हमने भी इस दौरान बंदी झेली और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी हमारी सरजमीं पर रहती है, इसलिए हमको ज्यादा सख्ती और कड़ाई से कोरोना नियंत्रण के काम में लगना पड़ा. शुरुआती दौर में जिस तरह आवागमन ठप हुआ, आर्थिक क्रिया-कलाप बंद या कम हुए और जिस तरह से कोने-कोने से परप्रांतियों का पलायन शुरू हुआ, इसकी उस दौरान तीखी आलोचना भी हुई, लेकिन आज वही सख्ती जब परिणाम दे रही है तो उसकी वाहवाही हम ही नहीं पूरी दुनिया कर रही है. इस महामारी के दौरान पूरे साल भर केंद्र सरकार ने जिस तरह राज्य सरकारों के साथ मिलकर आर्थिक पैकेजों और अन्य राहत के कदमों से लोगों की सहायता की, संक्रमितों का इलाज और जीवन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की. इस सबका असर है कि आज महामारी  हमारे बीच दम तोड़ रही है, यही नहीं हमने इस दौरान दवाई की अपनी आवश्यकता पूरी की. इसके साथ दुनिया को भी दवाई आपूर्ति की, मास्क और किट आपूर्ति किया और आज हमारी वैक्सीन की भी दुनिया भर से मांग आ रही है. कारण हमारी वैक्सीन सस्ती, सही और प्रभावी है. जैसे-जैसे कोरोना दम तोड़ रहा है वैसे-वैसे हमारी आर्थिक गतििवधियां भी तेज हो रही हैं और 2021-22 में 11.5 प्रतिशत गति से अर्थव्यवस्था के बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं कि कोरोना के चलते काफी तादाद में लोगों को बेरोजगार होना पड़ा, उनका धंधा-कारोबार प्रभावित हुआ. सरकार ने अपने पैकेजों के माध्यम से समाज के हर वर्ग और उद्यम के हर वर्ग को राहत देने का काम किया है, जिसका असर भी हुआ है अब फिर से एक बार अर्थ जगत की बहुआयामी गतिवधियों में गति आ रही है. बजट उनको प्रोत्साहन देने का समय है और इसलिए बजट से समाज के हर वर्ग को और उद्योग-व्यापार के हर वर्ग को प्रोत्साहन मिलने की आस है. सरकार को भी इसका भान है, कारण उसने बहुत पहले से देश को पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय कर रखा है और कोरोना काल के पहले देश की सारी आर्थिक गतिविधियां उसी तरह संचालित हो रही थीं। कोरोना के अवरोध ने उसमें व्यवधान खड़ा किया, लेकिन लक्ष्य अभी भी वही है और जिस तरह का संकल्प प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत भाजपा सरकार के हर कामों में  दिखता है वैसी ही संकल्प  इसमें भी है और उसी तरह की कदम ताल दिखाई दे रही है। अब देखना यह है कि वित्तमंत्री आज देश की अर्थव्यवस्था की गाड़ी को लक्षित विकास पथ पर तेजी से दौड़ाने के लिए कौन सा फार्मूला और कौन से प्रावधान जनता-जनार्दन के सामने रखती हैं। कारण भारत ने कोरोना काल की अपनी उपलब्धियों से देश सहित विश्व की उस आशा को और बलवती किया है, जिसकी गूंज मोदी युग के अभी तक के लगभग सात सालों में दुनिया को हुई है और बजट वह रास्ता दिखाता है, जिस पर चल कर उन आशाओं को साकार किया जाता है। इसलिए वह चाहे किसान हो या व्यापारी, उद्यमी हो या भवन निर्माता, नौकरी-पेशा व्यक्ति हो या मजदूर सबको इस बजट से वैसी ही आशा है जैसी हर बजट से होती है। लेकिन इस बार कुछ ज्यादा है कारण इस बार देश महामारी से उबर रहा है. इसने हर वर्ग को आहत किया है, हर वर्ग किसी ना किसी तरह का मरहम चाहता है, जिसकी मानसिकता भी सरकार की दिख रही है और जिस तरह की सक्रियता और संवेदना इस सरकार ने इस महामारी के काल में दिखाई है उम्मीद यही है की हर वर्ग को मरहम लगाने का काम इस बजट में होगा. इसमें कोई दो राय नहीं. देश आगे बढ़ रहा है और तेज गति से आगे बढ़ेगा और अपना लक्ष्य प्राप्त करेगा.


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