जिंदगी बचाने की जंग जारी

चमोली त्रासदीः ड्रोन, SDRF, ITBP, सेना की मशीनों से राहत एवं बचाव कार्य


चमोली

उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को भीषण त्रासदी के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तीसरे दिन भी जारी है। भारतीय सेना, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और भारतीय वायुसेना के अलावा नौसेना ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मोर्चा संभाला है। चमोली में तपोवन के पास सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने का काम जारी है। उत्तराखंड के DGP ने बताया कि अभी तक 29 शव बरामद किए जा चुके हैं। अभी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। उनकी तलाश के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।

बाढ़ का खतरा नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड आपदा को लेकर संसद में मंगलवार को जानकारी दी। शाह ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने बताया है कि अब निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा नहीं है और पानी का लेवल भी घट रहा है। ज्यादातार इलाकों में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी गई है। पांच क्षतिग्रस्त पुलों की मरम्मत भी शुरू कर दी गई है। शाह ने कहा कि आईटीबीपी के 450 जवान, एनडीआरएफ की पांच टीमें, भारतीय सेना की आठ टीमें, नेवी की एक टीम, भारतीय वायुसेना के पांच हेलिकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे हैं।

197 लोग लापता

अमित शाह ने बताया कि ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में एक टनल से 15 लोगों को बचाया गया है। दूसरे टनल में 25-35 लोगों के फंसे होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि एनटीपीसी के 12 लोगों को बचाया गया है। राहत और बचाव के सभी काम राज्य सरकार के साथ समन्वय के साथ किए जा रहे हैं। आपदा के बाद से 197 लोग अभी भी लापता हैं।

रेस्क्यू में लगा MI-17 हेलिकॉप्टर

तपोवन में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए अब ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन के जरिए तस्वीरें निकालकर अंदर के हालात का पता लगाने की कोशिश की जा रही है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा रहा है। हैदराबाद की एक टीम के पास ऐसी रिमोट सेंसिंग डिवाइस है, जो जमीन में 500 मीटर तक गहरे मलबे का पता लगा सकता है। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि एक हेलिकॉप्टर की मदद से इस डिवाइस का इस्तेमाल रेस्क्यू ऑपरेशन में किया जा रहा है।

पुलों की मरम्मत जारी

चमोली के जिलाधिकारी ने बताया कि हादसे में क्षतिग्रस्त पुलों की मरम्मत का काम जारी है, जबकि जिपलाइन को पहले ही ठीक किया जा चुका है। 

इसका इस्तेमाल एसडीआरएफ कर्मी उन इलाकों में पहुंचने के लिए कर रहे हैं, जो हादसे के बाद पूरी तरह से कट गए थे। राशन की आपूर्ति की जा रही है और हेलिकॉप्टरों की मदद से आपातकालीन मामलों को तुरंत देखा जा रहा है।


 

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