चीनी कारखानों में अब होगा बायो-सीएनजी का उत्पादन

मुंबई

राज्य में 125 चीनी मिलों की क्षमता को बढ़ाकर 101 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया गया है। निकट भविष्य में चीनी मिलों से जैव-सीएनजी का उत्पादन करने के प्रयास चल रहे हैं। चीनी कारखानों से उत्पन्न होने वाले लगभग एक लाख टन कचरे से लगभग 4,000 टन सीएनजी का उत्पादन किया जा सकता है। कचरे  और बायोमास से बनाई गई सीएनजी परियोजनाओं का निरीक्षण करके आने वाले वर्षों में स्थापित होने वाली सीएनजी परियोजनाओं की संख्या का अध्ययन किया जा रहा है। 

जल्द ही इसके लिए नेशनल शुगर एसोसिएशन के प्रतिनिधि हरियाणा के रोहतक में कार्बनिक पदार्थों से उत्पादित होने वाली सीएनजी परियोजना का दौरा करेंगे। राकांपा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता शरद पवार भी इस परियोजना का समर्थन कर रहे हैं, जिसे निकट भविष्य में गन्ना और कचरे वाले पानी से बायो सीएनजी गैस का उत्पादन शुरू किया जाएगा। चीनी की कीमत और गन्ने के मूल्य के बीच बेमेल सौदों के कारण चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। इसके समाधान के रूप में, इथेनॉल और बायो-सीएनजी का उत्पादन करने के लिए चीनी के उत्पादन को तीन मिलियन टन तक कम करने और इसे एक परियोजना में बदलने का प्रयास किया गया है। इस चीनी सीजन में इथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा दिया गया।राज्य के 125 कारखानों में इस वर्ष 200.24 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करने की क्षमता थी। अब यह 79.20 करोड़ लीटर बढ़ गया है। वर्तमान में, राज्य में चीनी मिलों में 360.89 करोड़ इथेनॉल का उत्पादन होता है।


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