चीन के टैंक घर को लौटे

राजनाथ ने दिलाया भरोसा | ड्रैगन से समझौते में कुछ खोया नहीं  |  चीन भी जान गया हमारा संकल्प

tanks

नई दिल्ली 

लद्दाख के विवादित इलाके से चीनी सेना के पीछे हटने की पहली तस्वीर सामने आई है। भारतीय सेना ने वीडियो जारी किया है, जिसमें चीन के टैंक फिंगर 8 की ओर लौट रहे हैं। भारतीय सेना भी अपनी पोस्ट पर लौट रही है। 24 जनवरी को दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच बातचीत में सहमति बनी थी। बता दें कि बुधवार को पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले भारत और चीन की सेना के लोकल कमांडर्स की मीटिंग हुई, जिसके बाद पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे से दोनों देशों ने अपने टैंकों को पीछे करना शुरू किया। प्रक्रिया की जांच भारत और चीन की सेना मिलकर कर रही है। हर दिन दो बार लोकल कमांडर्स मिल रहे हैं।

बता दें कि दोनों देशों ने दक्षिणी किनारे पर बड़ी संख्या में टैंकों की तैनाती की थी। बुधवार को टैंकों के साथ ही कॉम्बेट वाहनों को भी पीछे हटाना शुरू किया गया। टैंक अभी एक तय दूरी तक पीछे कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि हर कदम का दोनों देश संयुक्त जांच भी कर रहे हैं। इसमें फिजिकल जांच के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन भी होगा। इसके लिए सैटलाइट इमेज के साथ ही ड्रोन का इस्तेमाल भी किया जाएगा।

पीछे हटेंगी दोनों सेनाएं : राजनाथ सिंह

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा और लोकसभा में चीन और लद्दाख में भारत के गतिरोध को लेकर उठाए जा रहे कदमों को लेकर सदन को जानकारी दी। रक्षामंत्री ने कहा कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल(एलएसी) पर भारत की तैयारी पुख्ता है और लद्दाख में भारत को चीन पर बढ़त मिली हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने इस बातचीत में कुछ भी नहीं खोया है। रक्षामंत्री ने कहा कि भारतीय सेना के जवान सामरिक महत्व वाले इन इलाकों में बहादुरी से डटे हुए हैं। चीन के जवाब में भारत ने भी काउंटर किया है। भारत की सेनाओं ने इन परिस्थितियों का डटकर सामना किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और दोनों देशों की सेनाएं पेंगांग झील के किनारों से हट रही हैं। उन्होंने कहा कि चीन के साथ हो रही बातचीत में भारत का रुख स्पष्ट है और भारत ने अपनी ओर से तीन शर्तें रखी हैं। दोनों पक्षों द्वारा LAC को माना जाए और उसका आदर किया जाए। किसी भी पक्ष द्वारा यथास्थिति को बदलने के लिए एकतरफा कोशिश न की जाए। सभी समझौतों का दोनों पक्षों द्वारा पूर्ण रूप से पालन किया जाए।


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