फंदे में टूल टीम, 'ग्रेटा गैंग' बेनकाब

15 दिन पहले लिखी गई थी हिंसा की पटकथा    उपद्रव था 70 लोगों की साजिश का अंजाम


नई दिल्ली

कृषि कानून विरोधी आंदोलन के बहाने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में जो अराजकता की स्थिति पैदा हुई और हिंसक उपद्रव हुआ, वह देश-विदेश में रहने वाले 70 लोगों की साजिश का अंजाम था। गणतंत्र दिवस से 15 दिन पहले 11 जनवरी को 70 साजिशकर्ताओं की जूम एप पर मीटिंग हुई थी। इसे खालिस्तान समर्थक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीजेएफ) ने होस्ट किया था। इस मीटिंग में जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि, अधिवक्ता निकिता जैकब व इंजीनियर शांतनु भी शामिल था।

दिशा रवि व निकिता ने शांतनु व अन्य के साथ मिलकर टूलकिट (डॉक्यूमेंट) तैयार किया था। निकिता व दिशा रवि से पूछताछ व 300 से अधिक ट्विटर हैंडलरों की जांच पड़ताल के बाद अब तक की जांच में पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची है। दिशा रवि की गिरफ्तारी से पूर्व दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने 11 फरवरी को निकिता के मुंबई स्थित घर पर जाकर पूछताछ की थी। उससे पूछताछ के बाद 13 फरवरी को साइबर सेल ने पहले दिशा रवि को गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी के बारे में पता चलते ही निकिता जैकब भूमिगत हो गई। 

दिल्ली पुलिस ने अब निकिता जैकब व शांतनु को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी कराया है। दोनों की तलाश में 10 से ज्यादा टीमें कई राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। दिल्ली पुलिस अब मो धालीवाल पर नकेल कसने की तैयारी कर रही है। पुलिस की कोशिश है कि उसे भारत लाकर जांच में शामिल कराया जाए।

साइबर सेल के संयुक्त आयुक्त प्रेमनाथ ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि जांच में नया नाम सामने आया है। दिशा रवि ने पीटर फ्रेडरिक को भी ट्वीट में टैग किया था। पीटर खालिस्तानी आतंकी भजन सिंह भिंडर के संपर्क में 2006 से है। पीटर भी खालिस्तान समर्थक समूह के-2 ग्रुप से ताल्लुक रखता है।

पीटर का नाम टूलकिट के रिसोर्स में क्यों डाला गया, इसकी जांच की जा रही है। पीटर वर्तमान में मलेशिया में है। उसने दावा किया है कि वह फासीवाद पर शोध करने वाला एक कार्यकर्ता है। वह उन प्रदर्शनकारियों में शामिल रहा है, जिन्होंने अमेरिका में महात्मा गांधी की मूर्ति खंडित की थी।  पुलिस ने अब जूम से जानकारी मांगी है कि बैठक में शामिल 70 लोग कौन-कौन थे। पुलिस यह भी जानना चाह रही है कि बैठक में फ्रेडरिक शामिल था या नहीं? 

ऐसी रची गई पूरी साजिश...

खालिस्तानी संगठनों से जुड़े पीजेएफ के मो धालीवाल ने कनाडा में ही रहने वाली सहयोगी पुनीत के जरिये निकिता से संपर्क किया था। इसके पीछे मकसद गणतंत्र दिवस से पूर्व जोरदार तरीके से ट्विटर अभियान छेड़ना था। 11 जनवरी को हुई 70 लोगों की जूम मीटिंग में मो धालीवाल भी शामिल था। मीटिंग में धालीवाल ने कहा था कि मुद्दे को बड़ा बनाना है।

आंदोलनकारियों के बीच असंतोष और गलत जानकारी फैलाना इसका मकसद था। राजधानी में आइटीओ पर स्टंट के दौरान ट्रैक्टर पलटने से चालक की मौत हुई थी, लेकिन उसके पुलिस की गोली से मारे जाने की अफवाह फैलाई गई, जोकि इसी साजिश का एक अंश था। घटना के तुरंत बाद साजिशकर्ताओं ने ये अफवाह फैलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटी व एक्टिविस्ट से संपर्क किया था। चूंकि दिशा रवि, ग्रेटा थनबर्ग को जानती थी, इसलिए इसमें उसकी भी मदद ली गई।

शांतनु ने बनाया था वाट्सएप ग्रुप

टूलकिट तैयार करने के लिए जो वाट्सएप ग्रुप बनाया गया था, उसका एडमिन शांतनु था। 23 दिसंबर को उसने यह वाट्सएप ग्रुप बनाया था। वह महाराष्ट्र के बीड़ का रहने वाला है। निकिता, शांतनु और दिशा रवि तीनों एक्सआर नाम के एनजीओ से जुड़े हुए हैं। 

इसी बीच मामले में आरोपी शांतनु ने बॉम्बे हाई कोर्ट  की औरंगाबाद बेंच में याचिका दाखिल कर अग्रिम जमानत मांगी है। शांतनु के वकील सतीज जाधव ने बताया कि अग्रिम जमानत पर आज सुनवाई होगी। 

इस बीच दिशा की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा विरोधी दल एक  बार फिर एकजुट हो गए हैं और दिशा रिहाई की मांग करने लगे हैं। इतना ही नहीं इस मामले में पाकिस्तान भी कूद गया है। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ ने इस मामले में भारत सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक खबर को शेयर करते हुए लिखा है कि भारत सरकार अपने खिलाफ उठने वाली सभी आवाजों को शाांत कर रही है।

 

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