कांग्रेस की फूट डालो, झूठ बोलो और राज करो की नीति : मोदी

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कोयंबटूर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कोयंबटूर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने पांच साल में पुडुचेरी में दिखा दिया कि वे कैसे राष्ट्रीय स्तर पर काम करते हैं।

हमारी औपनिवेशिक शासकों की नीति फूट डालो और राज करो की थी। कांग्रेस की नीति फूट डालो, झूठ बोलो और राज करो की नीति है। उनके नेताओं ने लोगों से लोगों को लड़ाने का काम किया। वहीं पीएम मोदी ने कहा कि सरकार सभी वर्गों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मैं अभी एक कार्यक्रम से आया हूं जहां, विभिन्न क्षेत्रों के लिए कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। इससे तमिलनाडु के लोगों को इज ऑफ लिविंग और गरिमा से जीने में मदद मिलेगी।  

भारत के छोटे किसानों के लिए काम करके हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। किसान क्रेडिट कार्ड से लेकर स्‍वास्थ्य हेल्थ कार्ड तक, ई-एनएएम से एक प्रभावी फसल बीमा योजना तक, हम कृषि क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव लाना चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि हमारा छोटा किसान किसी पर निर्भर रहे। हम नहीं चाहते कि हमारा किसान बिचौलियों के कारण घुटन महसूस करे। पीएम किसान योजना को बुधवार को ही दो साल पूरे हुए हैं। इस योजना से 11 करोड़ किसानों को फायदा हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि आज देश दो अलग-अलग तरह की राजनीति देख रहा है। एक विपक्ष की राजनीति जो कुशासन और भ्रष्टाचार से ग्रस्त है। जबकि NDA  शासन और लोगों के प्रति दया के साथ राजनीति करता है। दोनों तरीके बहुत अलग हैं। विपक्ष के लिए व्यक्तिगत लाभ ही सब कुछ है। डीएमके और कांग्रेस की बैठकें भ्रष्टाचार के हैकथॉन की तरह हैं। उनके नेता बैठते हैं और मंथन करते हैं कि कैसे लूट की जाए। इनके नेताओं में जो सबसे नए तरीके सुझाते हैं उन्हें पद और मंत्रालय दिए जाते हैं। विपक्ष की राजनीति उत्पीड़न पर आधारित है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा तमिलनाडु जानता है कि डीएमके ने अम्मा जयललिता जी के साथ कैसा व्यवहार किया। इससे महिलाओं के प्रति उनके रवैये का पता चलता है। दुख की बात है कि जयललिता जी को परेशान करने वाले नेताओं को डीएमके और कांग्रेस ने पुरस्कृत किया। द्रमुक ने पूरे तमिलनाडु की पार्टी कहलाने के हक को खो दिया है। राज्‍य की जनता उन्‍हें नकार चुकी है। पिछली बार 25 साल पहले उसने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया था।  प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस और द्रमुक दोनों पार्टियां आंतरिक विरोधाभासों से पीड़ित हैं। दोनों पक्षों ने पहले अपने परिवारों को लांच करने  की कोशिश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। वहां लगातार पारिवारिक ड्रामा चल रहा है। वे तमिलनाडु में सुशासन नहीं दे सकते हैं। (शेष पेज 5 पर)


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