कोरोना के बावजूद अगरबत्ती की मांग 25% बढ़ी

agarbatti

नई दिल्ली

कोविड ने कई रूपों में हमारी खरीदारी की आदतों को प्रभावित किया है। ऑल इंडिया अगरबत्ती मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (एआईएएमए) के अनुसार, महामारी ने पुरानी मधुर स्मृतियों में फिर से रुचि पैदा कर दी है और मसाला अगरबत्तियों के प्रति लगाव काफी बढ़ गया है। एसोसिएशन के अनुसार, पिछले एक वर्ष में मसाला अगरबत्तियों की मांग 25 प्रतिशत बढ़ी है। मसाला अगरबत्ती परंपरागत किस्म की अगरबत्ती है, जिन्हें धूप, मसालों, जड़ी-बूटियों और अन्य प्राकृतिक पदार्थों से हथेलियों के सहारे घुमाकर तैयार किया जाता है। मसाला अगरबत्तियों के प्रति यह झुकाव महागनगरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन अगरबत्तियों की मांग लगातार बढ़ रही है। एआईएएमए के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी मसाला अगरबत्ती के प्रति रुचि 30 प्रतिशत बढ़ी है। संयुक्त राज्य अमेरिका एक ऐसा ही प्रमुख बाजार है, जिसे मसाला अगरबत्तियों की खुशबू बेहद पसंद आयी है। मसाला अगरबत्तियों के बढ़ते बाजार के बारे में विस्तार से बताते हुए, एआईएएमए के प्रेसिडेंट अर्जुन रांगा ने कहा कि भारतीय अगरबत्ती हमारे देश की सुगंध दूत (फ्रैग्रेंट एंबेसडर) है और मसाला अगरबत्तियों ने इस दिशा में परिवर्तनकारी भूमिका निभायी है। इन अगरबत्तियों से अत्यंत विशिष्ट एवं राहतप्रद खुशबू निकलती है और इस खूबी ने उपभोक्ताओं को आकृष्ट किया है। दरअसल मसाला अगरबत्तियों का उपयोग अब केवल पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है। इससे इंडस्ट्री को नया ग्राहक आधार हासिल करने में मदद मिली है और घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में पैठ बढ़ी है।

 

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