पाकिस्तान का शांति स्वांग?

अभी भारत पाक में समझौता सामने आने बाद चंद दिन नहीं बीते कि बालाकोट स्ट्राइक की बरसी पर पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार  फिर  पाकिस्तान का चिर परिचित और कालवाह्य राग अलापना शुरू कर दिया है, जो  दुनिया को छोड़िए पाकिस्तानी निजाम को छोड़ दें तो उनकी  आवाम को भी बेसुरा लगता है. निजाम के अपने स्वार्थ  हैं, लेकिन देश की दिवालियापन की असली भुक्त भोगी तो आवाम ही है, जिस तरह की बयानबाज़ी इमरान ने बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक  के बरसी के अवसर पर की और पाक की शांतिप्रियता और पाकी सेना के शौर्य का बखान किया, वह  कितना सही है दुनिया जानती है. लफ्फाजियों की, झूठ की  एक सीमा होती है. वह प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति के लिये शोभनीय नहीं है. आतंकवाद को पालने -पोषने और उसे कारोबार तथा राजनय का अंग बनाने का उसका कारनामा, उसके द्वारा दूसरे देशों में वांछित अपराधियों को पनाह देने के कारनामे और अन्य पातक दुनिया अच्छी  तरह जानती है. साथ ही इन सबक कामों को पाक के निजाम यानी सरकार और सेना का संरक्षण है. यह भी सर्व विदित है,तो पाकिस्तान कितना  जिम्मेदार देश है, उसकी सेना  कितनी बहादुर है और उसके नेता कितने पाक साफ़ हैं, यह दुनिया में सबको अच्छी  तरह से पता है. इसलिए उसका यशोगान अपने ही मुंह कर के  इमरान सिर्फ  दुनिया का मनोरंजन  कर  रहे हैं, हंसा रहे हैं. उन्हें यह सब कैसे याद आया और कैसे हमसे समझौता किया  कैसे उन्हें यह भान हुआ कि वे जिम्मेदार देश हैं और शांति दूत हैं यह भी सबको मालूम है. उनकी गलती क्या है इसका उन्हें एहसास नहीं है, इसलिए ऐसे हास्यास्पद विधान कर रहे हैं और उनकी गलती है अपनी कथनी और करनी में सही ना होना.आपने हमसे  समझौता किया है कि अब सीज फायर उल्लंघन नहीं होगा. जितने अग्रीमेंट हैं, उसी परिधि में बात होगी,तो उस पर टिकना चाहिये, भरोसा पैदा होने देना चाहिए, लेकिन आप का मन इतना काला है, आप इतने  बेसब्रे हैं कि अभी समझौता हुए बहत्तर घंटे नहीं हुआ आपने अपनी वही पुरानी नीति कश्मीर का बेसुरा राग अलाप अपनी कु‌ित्‍सत मनसा जाहिर कर दी. इमरान खान को मालूम होना चाहिए कि आपने अभिनंदन  को वापस कर कोई मेहरबानी नहीं की है ,आपको पता था कि ना वापस करने का अंजाम क्या होगा अौर आज भी आप आसानी  से समझौते की राह पर नहीं आये हैं.  हमारी सर्जिकल स्ट्राइक्स ने, आपके द्वारा हमारे खिलाफ की जा रही अलगाववादी और आतंकवादी साजिशों का पर्दाफाश होने से और आपके हर नकारात्मक कदम का कड़ा प्रतिकार किए जाने से और आपके काले कारनामे और आतंकी कारोबार दुनिया के  सामने उजागर हो जाने से आप यह समझ गये हैं कि नए भारत से यदि आप उलझे तो अापका अंजाम बहुत बुरा होगा और आपको दिन में भी हमारे हमले के सपने आने  लगे हैं। आप सारी दुनिया से गुहार लगा कर देख लिए किसी ने  नहीं सूनी. यहां तक मुस्लिम देशों ने भी नहीं तो आपके पास शांति का दूत और उसका उपदेशक बनने  का स्वांग रचने के  सिवाय कोई चारा नहीं था.आपको यह एहसास होना चाहिए कि कोई भी रिश्ता स्वांग पर या मुंह में राम बगल मंे छुरी की नीति पर नहीं आधारित हो सकता और पाक की यही गलती है कि वह शांति को लेकर ईमानदार नहीं हैं। हमारे प्रति उसकी कटुता खत्म नहीं हो रही है .वह बात तो ईमानदारी की करता है, परन्तु वह मात्र दिखावा है.उसका असली मकसद हमेशा हमारा अनिष्ट ही है. इस बार फिर उसने शांति का स्वांग रचा है या वह वास्तव में हमसे रिश्ते सामन्य करने के  प्रति गंभीर है, ईमानदार है यह आगे आने वाले दिनों में  पता चलेगा,लेकिन जिस तरह के बोल अभी से इमरान बोलने लगे हैं. उसके मद्दे नजर यह काफी संदिग्ध लगता है.तो पाक को यह जान लेना चाहिए कि नए भारत में इस तरह की हरकतों को तुरंत पहचान कर उसका यथोचित बंदोबस्त किया जाता है. इस लिए पाक जो भी कदम दोस्ती का बढ़ाए ईमानदारी से बढाए. बदनीयती से शराफत का लिबास ओढ़कर स्वांग रचना उसे कहीं का नहीं छोड़ेगा. 


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