हम कब सबक लेंगे और सही कदम उठाएंगे

एक बार फिर देश और राज्य के कई क्षेत्रों में लॉकडाउन, नाईट कर्फ्यू शुरू हो गया है. सरकार की तमाम चेतावनियों के बाद भी ऐसी स्थिति पैदा हुई इसके लिए हमारे समाज के ही लोग जिम्मेदार हैं. इस आरोप से कोई बच नहीं सकता. सरकार चेतावनियां देते थक रही है. लोग महामारी से बचने के निर्देशों का सख्ती से अनुपालन करें, मास्क पहने, इसके अलावा इससे बचने के लिए तय अन्य दिशा-निर्देशों का कठोरता से पालन करें, इसके लिए कड़े कदम उठाए, मार्शल लगाए, जुर्माना सख्ती से वसूलना शुरू किया, इसके बावजूद यदि कोरोना का संकट पुनÑ खतरे के निशान को पार कर रहा है और चिंता जनक स्थिति सामने आ रही है, इसके कयास लगाने शुरू हो गए की क्या एक बार फिर लॉकडाउन लगेगा की नहीं, तो इसका मतलब साफ़ है कि हममें से अधिकांश लोगों ने ऐसा व्यहार करना जारी रखा, जिससे महामारी को दोबारा सर उठाने का मौका मिला है और वह भी तब जब वैक्सीन लगना शुरू हो चुकी है और बड़ी तेजी से टीकाकरण हो रहा है. यह भी हिदायत दी गयी है कि पहला टीका लगावाने के बाद लगभग के एक महीने में दूसरा टीका लगेगा और उसके दो हफ्ते बाद व्यक्ति में इम्युनिटी आयेगी. उसके बाद भी जब तक देश में हर्ड इम्युनिटी नहीं विकसित हो जाती, तब तक सावधानी की जरूरत है. सबके सामूहिक प्रयासों से महामारी को रोकने में सफलता मिली थी, लेकिन कम होते ही ऐसा व्यवहार करना कि जैसे सब कुछ ठीक हो गया है. इसी ने आज पुनÑ हमारी िस्थति चिंतनीय बना दी है और फिर राज्य को संक्रमण के मामले में देश में प्रमुख स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया है. आज राज्य के कई शहरों में लॉकडाउन है, कहीं नाईट कर्फ्यू लग गया है, मुंबई और पुणे में भी कई जगह बंदिशें लगाई गयी है, स्थिति पर नजर है यदि संक्रमण बेलगाम हुआ तो और कड़े कदम उठाने के लिए राज्य शासन बाध्य हो सकता है. बड़े मुश्किल से आर्थिक गतिविधियां शुरू हुई है. यदि पुनÑ तालाबंदी की नौबत आती है तो क्या होगा, हमने लापरवाही बरतते समय इस पर विचार नहीं किया. गलती कुछ लोग करते हैं और खामियाजा उनके परिवार, उनके आस-पास रहने वाले लोगों यानि पूरे समाज को भुगतना पड़ता है. ऐसे भी मामले समाने आए हैं, जहां संक्रमित होने के बाद लोगों ने अपने को एकांतवास में रखना मुनासिब नहीं समझा और उनके इस लापरवाही का खामियाजा आज उनका पूरा परिवार झेल रहा है और वह संक्रमित हो गया है. आस-पास के लोग पड़ोसी डरे हुए हैं कि संक्रमण ना फ़ैल जाए, पढ़े-लिखे जानकार लोगों द्वारा की जा रही ऐसी नादानियां जितनी लज्जाजनक हैं, उतनी ही त्रासद भी. इस समय ऐसी लापरवाही अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आनी चाहिए और ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे कोई दूसरा ऐसा करने की हिमाकत ना कर सके. ऐसी छोटी छोटी लापरवाहियां समस्या को और विकराल बना रही हैं और एक बार फिर राज्य के उस जनमानस को जो सारी सावधानियां बरत रहा है, सारे निर्देशों का पालन कर रहा उसे डरा रही है. उसका आवागमन दूभर कर रही है, इस सबसे तो यही लगता है कि हमने गत लॉकडाउन में जो कुछ देखा है, झेला है उससे सबक नहीं लिया है और यदि सबक लिया है, तो फिर ऐसी जानलेवा लापरवाही क्यों कर रहे हैं. तो आइये कम से कम अब तो हम सब यह गांठ बांध लें कि अब हममें से कोई ऐसा कुछ नहीं करेगा, जिसके चलते हम कोरोना के प्रसार में सहायक बनें और यदि हमारे आस पास कोई ऐसा करता है तो उसे रोकेंगे और कोरोना के नियमों का पालन करने का अनुरोध करेंगे, बावजूद इसके यदि वह नहीं मानता हो उसकी शिकायत सक्षम अधिकारियों के पास करेंगे तभी स्थिति नियंत्रित होगी और हम सब लॉकडाउन, आंशिक बंदी, पूर्ण बंदी आदि के झंझटों से बचेंगे और संक्रमण से भी हमारी रक्षा होगी. यह आज की मांग है. हमारे राज्य का शुमार देश के प्रगत राज्य में होता है, हमें वैसा ही व्यवहार करना है. यह नहीं कि उसके उलटा हो. हमें अब तक की गलतियों से सबक लेते हुए आगे उन्हें नहीं होने देना है. 


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