'लेटर बम' प्रकरण की निष्पक्ष जांच जरूरी

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त का सनसनीखेज रहस्योद्घाटन जिसने राज्य में राजनीतिक भूचाल ला दिया है और राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, निसंदेह गंभीर जांच की मांग करता है. कारण जो कुछ हुआ है वह बहुत गंभीर और अभूत पूर्व है. जिस तरह वझे प्रकरण के बाद यह मामला समाने आया है आम और खास दोनों तरह की रियाया की बेचैनी बढ़ा रहा है और यह सोचने को बाध्य कर रहा है कि क्या महाराष्ट्र में सब कुछ ठीक है. यह निसंदेह महाराष्ट्र सरकार की छवि खराब करने वाला रहस्योद्घाटन है और राज्य के राजनीतिक हलकों में इसे लेकर जो हलचल बढ़ी है, वह इस बात की परिचायक है. राज्य की आवाम वझे प्रकरण और परमबीर सिंह के लेटर बम इन दोनों प्रकरणों की सच्चाई से अवगत होना चाहती है. यह अनायास ही नहीं है कि विपक्ष ही नहीं कांग्रेस जैसा अघाड़ी का सहयोगी और सत्ता में भागीदार भी गृह मंत्री के इस्तीफा की मांग कर रहा है और विपक्ष द्वारा तो इस्तीफे की मांग करना, सरकार की बर्खास्तगी की मांग करना स्वाभाविक  है. आवश्यक है कि महाराष्ट्र सरकार और इस सरकार के भागीदार तीनों दल के वरिष्ठ नेता उक्त दोनों प्रकरणों की गंभीरता को समझें और इन मामलों के चलते पुलिस बल के मॉरल पर जो असर हो रहा है, राज्य की छवि को जो बट्टा लगा रहा है, आम अावाम में जो सरकार की कार्यशैली को लेकर शंका और भ्रम पैदा हो रहा है, उसका विश्वास डगमगा रहा है उसे सही करने के लिए हरसंभव कदम त्वरित उठाए. वझे और हिरेन प्रकरण की जांच एनआईए कर रही है, रोज नए-नए पर्दाफाश हो रहे हैं जल्द ही पूरी सच्चाई सबके सामने आने की उम्मीद है. इस प्रकरण की भी सांगोपंग और निष्पक्ष जांच होने के लिए जो भी किया जा सकता है वह तुरंत किया जाए, कारण यह आरोप किसी ऐरे गैरे नत्थू खैरे पर नहीं बल्कि राज्य के गृह मंत्री पर लगाए गए हैं. इन दोनों मामलों से एक ऐसा मैसेज देश और दुनिया में जा रहा है कि महाराष्ट्र पुलिस उसे जो काम करना है वह करने की बजाय कुछ और ही कर रही है, कहीं विस्फोटक रख रही है, कहीं नेताओं के लिए वसूली कर रही है. संक्षेप में पुलिस नेताओं के हाथों की कठपुतली बन गयी है. कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने का काम, अपराधियों और जरायम पेशा लोगों पर नकेल कसने का जो उसका काम है, वह काम पुलिस कैसे करेगी. जब उस पर उपरोक्त तरह के कामों में लिप्त होने का आरोप लगेगा, जब उस पर इस तरह के काम करने के आरोप लगेंगे या दबाव रहेगा, तो वह अपना असली काम करने का संबल कहां से लाएगी. इसलिए इन आरोपों की तह में जाना पुलिस बल की साख बनाए रखने के लिए भी जरूरी है, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार को हर जरूरी कार्रवाई करनी होगी. उक्त दोनों प्रकरणों से एक बार फिर राज्य की पुलिस व्यवस्था पर एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है, उसमें राजनीतिक हस्ताक्षेप, उसमें व्याप्त कदाचार को नए सिरे से सामने ला दिया है, पहले इन प्रकरणों में दूध का दूध और पानी का पानी होने दिया जाए और उसके लिए जिम्मेदार लोगों को उसके यथोचित अंजाम तक पहुंचाया जाए, उसके बाद इस व्यवस्था की  देशव्यापी समीक्षा बहुत जरूरी है. कारण पुलिस शासन का महत्वपूर्ण घटक है, यदि उसमें इस तरह का भटकाव  दिखाई देगा या देखने को नेताओं द्वारा बाध्य किया जाएगा तो फिर उस देश और राज्य का क्या हाल होगा. इसलिए लेटर बम प्रकरण की निष्पक्ष और त्वरित जांच समय की मांग है. राज्य सरकार इसके लिए जो भी आवश्यक हो तुरंत करे और लोगों का भरोसा पुलिस और सरकार पर कायम रहे यह सुनिश्चित करे, नहीं तो जंगल राज की स्थित बनने से कोई नहीं रोक पाएगा. जो किसी के हित मे नहीं होगा। इसलिए इस तरह की बातों को लेकर कड़ी कार्रवाई की आवश्‍यकता है।  


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