आपातकाल को लेकर घिरे राहुल


नई दिल्ली

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने राहुल गांधी के उन आरोपों को बेबुनियाद बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा नीत सरकार में वर्तमान समय में जो हो रहा है वो आपातकाल से भी बदतर है। गडकरी ने कहा, 'मैं इमरजेंसी को भुगत चुका हूं। इमरजेंसी में मेरे नाना की मृत्यु हो गई और उस समय मेरे मामा जेल में थे। मैंने उस साल अपनी शिक्षा छोड़ दी थी और फिर उसी के कारण जयप्रकाश जी की प्रेरणा से राजनीति में आया। तो मैं इमरजेंसी देख चुका हूं। बहुत बुरी हालत थी। मुझे याद है कि सुप्रीम कोर्ट में नीरेन डे जो अटॉर्नी जनरल थे... जज ने उनको पूछा था कि अगर इमरजेंसी में किसी को गोली मार दी जाए तो क्या उसे न्याय मांगने का भी अधिकार नहीं है, तो उनका जवाब था नहीं है। अगर कोई पुलिस अधिकारी गोली मारता है, तो पीड़ित को न्याय मांगने का अधिकार नहीं है। राहुल गांधी ने शायद उस स्थिति का अनुभव नहीं किया होगा, वो बहुत बुरे दिन थे और हमारे राज में अभी ऐसी कोई इमरजेंसी नहीं है। हम लोकतंत्र के साथ चल रहे हैं उनका आरोप बेबुनियाद और गलत है।'

'देशभक्ति की सबसे बड़ी  पाठशाला है आरएसएस'

इधर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राहुल गांधी को आरएसएस को समझने में बहुत समय लगेगा। उन्होंने कहा, 'आरएसएस देशभक्ति की दुनिया में सबसे बड़ी पाठशाला है। इसलिए दुनिया में उसका आदर है और भारत में इसकी भूमिका है। लोगों में अच्छा परिवर्तन लाना, लोगों को देशभक्ति के लिए प्रेरित करना, यही संघ करता है।'

जावड़ेकर ने आपातकाल को लेकर राहुल गांधी के उस बयान को भी हास्यास्पद बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि आपातकाल एक भूल थी, लेकिन कांग्रेस ने कभी संस्थागत ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया। उन्होंने आगे कहा, 'आपातकाल के समय सारे संगठनों की आजादी खत्म कर दी गई थी। सभी पार्टियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सारे सांसदों और विधायकों को भी गिरफ्तार कर लिया गया। लाखों लोगों को बंदी बनाया गया। साथ ही साथ अखबारों की आजादी खत्म कर दी गई। संस्थागत ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाया, ऐसा कहना हास्यास्पद है।'


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