मॉल में कोरोना टेस्ट से लोगों में नाराजगी

ग्राहक हुए नदारद, सुनसान हुए मॉल 

mall

मुंबई

मनपा प्रशासन द्वारा शॉपिंग मॉल में आने वाले लोगों का कोरोना टेस्ट करने के लिए गए निर्णय से मॉल सुनसान हो गए हैं। टेस्टिंग के डर से लोगों का मॉल में आना बंद हो गया है। मॉल में होने वाली आरटी-पीसीआर टेस्टिंग की कीमत 250 रुपए रखी गई है, जिसको लेकर भी ग्राहकों में नाराजगी देखी जा रही है। मनपा के निर्देश का कुछ जगहों पर गलत फायदा उठाया जा रहा है। कई जगहों पर मॉल नहीं होने के बावजूद उन्हें मॉल में जोड़ दिया गया है, जिससे कई जगहों पर मॉल में बने ऑफिस में भी लोगों को नहीं जाने दिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि मनपा प्रशासन ने मुंबई में बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए टेस्टिंग बढ़ा दी है। मनपा ने मुंबई के मॉल, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर टेस्टिंग करने का निर्णय लिया है। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर टेस्टिंग मुफ्त रखी है, जबकि मॉल में 250 शुल्क लेकर कोरोना की जांच की जा रही है। इसलिए मॉल में जाने वाले लोग घबरा रहे हैं। घाटकोपर स्थित आर सिटी मॉल में आए धर्मेश ठक्कर ने कहा कि मनपा प्रशासन ने कोरोना के नाम पर लूट मचाई है। मनपा वार्ड कार्यालयों सहित रेलवे स्टेशन परिसर में टेस्ट मुफ्त में किया जा रहा है, जबकि मॉल में 250 रुपए वसूला जा रहा है। मनपा ने मुंबई के सभी मॉल में रोजाना का 400 लोगों के टेस्ट का टारगेट रखा है। इसके चलते मॉल में कोई आ ही नहीं रहा है, जिससे मॉल पूरी तरह बंद दिखाई दे रहे हैं।

वार्डों में कोरोना टेस्ट की लंबी कतार

मनपा के सभी वार्ड कार्यालयों में कोरोना टेस्ट कराने वालों की लंबी कतार देखी जा रही है। घाटकोपर स्थित एन वार्ड में लोगों की लंबी कतार देखी गई। इसी तरह मनपा के सभी 24 वार्डों में कोरोना टेस्ट कराने को लेकर लंबी कतार लगी हुई है।

मॉल के ऑफिस में आने वालों की जबरन टेस्टिंग  

मुंबई में कई ऐसे मॉल हैं, जिनमें लोगों के कार्यालय हैं। मॉल के इन गालों में किसी तरह के सामान की विक्री नहीं होती है, इसके बावजूद इन ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों को भी रोक दिया जा रहा है। घाटकोपर में ओड़ियन सहित कई ऐसे मॉल हैं, जिनमें सामान्य लोगों की आवाजाही नहीं है। इसमें काम करने वाले कर्मचारियों को भी अंदर जाने से रोका जा रहा है। एन-वार्ड के सहायक आयुक्त  अजीत कुमार आम्बी ने बताया कि कुछ मॉल हैं जो कि मॉल नहीं है, लेकिन मॉल के रूप में दर्ज हैं। इसलिए मॉल में काम करने वाले कर्मचारियों को भी टेस्टिंग करवाना पड़ रहा है। जो मॉल नहीं है, उन्हें मॉल की श्रेणी से हटाने के लिए मनपा के अतिरिक्त आयुक्त से अनुमति लेकर उन्हें मॉल के नाम से राहत देने की कार्रवाई शुरू की जा रही है।


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