बच्चों को बचत करना सिखाएं

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बच्चों को पैसे की अहमियत के बारे में बताना और उनमें अच्छी फाइनेंशियल हैबिट्स विकसित करना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उनकी सेहत का खयाल रखना। उन्हें जेब खर्च और एक गुल्लक देकर इसकी शुरुआत की जा सकती है। यदि हम बच्चों को कम उम्र में ही एहसास करा दें कि पैसे से हम क्या कुछ कर सकते हैं और बचत करना असल में खुद को ताकतवर बनाना है, तो उनका आगे का जीवन आसान हो जाएगा। उन्हें पता होगा कि क्या करना है और क्या नहीं। इसके साथ ही उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि पैसा जीवन को आसान बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है, लिहाजा आमदनी जरूरी है और इस बात का खयाल रखना इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि खर्च हमेशा आय से कम हो। इन चार तरीकों से आप अपने बच्चे में वित्तीय समझ विकसित कर सकते हैं:

जेब खर्च से बचाना सिखाएं

बच्चे को हर महीने बतौर जेब खर्च एक छोटी-सी रकम देकर इसकी शुरुआत की जा सकती है। इसके साथ ही उन्हें एक गुल्लक देना उनमें बचत की आदत डलवाने का स्मार्ट तरीका हो सकता है। 

बच्चे को बताएं कि जेब खर्च महीने भर चलाना है और यदि वह इसमें से कुछ बचा लेता है, तो वह पैसा गुल्लक में डाल दे। ऐसा करके वह धीरे-धीरे अच्छी-खासी रकम जमा कर सकता है। बाद में इस पैसे से वह मनचाहा सामान खरीद सकता है। या फिर इस पैसे को बच्चे के नाम से निवेश किया जा सकता है।

 छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं

बच्चे के साथ बैठें। उनके गुल्लक में जमा होने वाले पैसे को सही जगह खर्च करने के बारे में उससे बातचीत करें। इस बारे में उसकी राय लें कि वह क्या चाहता है। बच्चा बहुत छोटा हो और तय नहीं कर पा रहा हो, तो खुद ही उसके लिए छोटे-छोटे लक्ष्य तय कर सकते हैं। मसलन यदि वह 1,000 रुपए जोड़ ले तो कोई मनपसंद खिलौना खरीद सकता है। गुल्लक में 4,000-5,000 रुपए जमा हो जाए तो बेहतर साइिकल खरीद सकता है। उसे भरोसा भी दिलाएं कि पैसे कम पड़ने पर आप मदद करेंगे।

घरेलू आय-खर्च से जोड़ें

बच्चे को घर के फाइनेंशियल सिस्टम से जोड़ें। ध्यान रखें कि उसे यह नहीं लगना चाहिए कि कुछ सिखाया जा रहा है। उसका इन्वॉल्मेंट स्वाभाविक होना चाहिए। छोटी-मोटी खरीदारी की लिस्ट उसके साथ मिलकर बनाएं। फिर हिसाब लगाएं कि उसमें कितना खर्च होगा और वह पैसा कहां से आएगा। ऐसा करने से वह अकाउंट्स का बेसिक सीख सकता है। उसे यह भी पता चल जाएगा कि हर चीज जिसका वह इस्तेमाल करता है, उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। 

बेवजह शॉपिंग से बचाएं

आज की तारीख में हर चीज स्मार्ट गैजेट पर उपलब्ध है। ज्यादातर मामलों में स्टोर पर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। ऐसे में बच्चे गैर-जरूरी चीजों की ऑनलाइन शॉपिंग करने लगे हैं। ऐसी आदत न लगे, यह सुनिश्चित करने की पहली जिम्मेदारी पैरेंट्स की ही होती है। लेकिन, यह जिम्मेदारी निभाते समय हमें ध्यान रखना होगा कि बच्चों को स्मार्ट गैजेट्स इस्तेमाल करने और ऑनलाइन शॉपिंग से रोकना हमारा मकसद नहीं है। उन्हें केवल गैर-जरूरी शॉपिंग से रोकना है और वह भी रजामंदी से, दबाव बनाकर नहीं।


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