शीघ्र ही राज्य में बनेगी पुस्तकालय नीति

पटना   

बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि राज्य में शीघ्र ही पुस्तकालय नीति बनाई जाएगी। चौधरी ने भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) के सुदामा प्रसाद की ध्यानाकर्षण सूचना का जवाब देते हुए कहा कि शिक्षा में गुणवत्ता की दृष्टि से पुस्तकालयों का विकसित किया जाना महत्वपूर्ण है। उनका विभाग इस संबंध में राज्य पुस्तकालय नीति बनाकर आगे की कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि सूचना क्रांति के इस दौर में घर बैठे ही जानकारी उपलब्ध है। इसका लाभ पुस्तकालयों को कैसे मिले इसके लिए सरकार पुस्तकालय नीति बनाना चाहती है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पुस्तकालय नीति बनाते समय विधायकों के सुझावों को भी आमंत्रित किया जाएगा। सभाध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने इस पर जानना चाहा कि क्या डिजिटल लाइब्रेरी पर भी विचार है तब मंत्री ने कहा कि उनका इशारा इसी ओर ही था। इससे पूर्व चौधरी ने कहा कि राज्य में तीन तरह के पुस्तकालय हैं। इनमें एक केंद्रीय, दो राजकीय और 47 अराजकीय वर्गीकृत पुस्तकालय हैं। राजकीय पुस्तकालय को छोड़कर अन्य 2 कोटि के पुस्तकालयों को राज्य सरकार की ओर से सहायक अनुदान दिया जाता है। इस अनुदान की राशि का उपयोग पुस्तकालय की स्थापना एवं कर्मी के वेतन मद में किया जाता है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि अराजकीय वर्गीकृत पुस्तकालयों का संचालन एवं प्रबंधन स्थानीय स्तर पर गठित प्रबंध समिति करती है। वर्ष 2012 में राज्य सरकार द्वारा अराजकीय वर्गीकृत पुस्तकालयों के विकास एवं संवर्धन के लिए 1० करोड रुपए की स्वीकृति दी गई थी। इस राशि से सभी पुस्तकालयों की प्रबंध कारिणी समिति द्वारा पुस्तकें भी क्रय की गई हैं। संबंधित पुस्तकालयों में स्वीकृत पद के अधीन समय-समय पर उत्पन्न रिक्तियों के विरुद्ध नियुक्ति की कार्रवाई प्रबंध कारिणी समिति द्वारा की जाती है। उन्होंने कहा कि अभी नए पुस्तकालयों को स्थापित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।


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