परमबीर का तबादला रूटीन नहीं

कुछ अक्षम्‍य गलतियां की थीं : देशमुख  


मुंबइ

राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने पहली बार मुंबई पुलिस आयुक्त के तबादले और सचिन वझे मामले पर बातचीत की है। देशमुख ने कहा कि मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का तबादला रूटीन नहीं था, जांच में कुछ ऐसी बातें सामने आई, जो अक्षम्य हैं। ऐसे में उन्होंने और मुख्यमंत्री ने जांच में कोई बाधा नहीं आए, इसलिए उन्हें पद से हटाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इधर-उधर से जानकारी लेता है। कहा जाता है कि गृह विभाग तीन दल मिलकर चलाते हैं। इस बारे में अनिल देशमुख ने कहा कि वे गृह मंत्री हैं। तबादलों के बारे में निर्णय मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद लिया जाता है।  अनिल देशमुख ने कहा कि एनआईए और एटीएस के जरिए मामले की जांच शुरू है। इस जांच से ही कई बाते सामने आईं। मुंबई पुलिस प्रमुख के रूप में उनके कार्यालय में उनके सहयोगियों की तरफ से की गई गलतियां अक्षम्य हैं और उन्हें माफ नहीं किया जा सकता। ऐसे में उनके तबादले का फैसला लिया गया। महाराष्ट्र पुलिस, मुंबई पुलिस विश्व प्रसिद्ध है। कुछ पुलिस अधिकारियों ने गलतियां की हैं। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एनआईए विस्फोटक मामले की जांच करेगी। एनआईए और एटीएस एक पेशेवर एजेंसी है और वे अपराधी को ढूंढ निकालेगी। विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फड़नवीस ने आरोप लगाया है कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब वर्ष 2018 मे सचिन वझे को सेवा में वापस लेने का उन पर दवाब था। इस पर अनिल देशमुख ने कहा कि एपीआई दर्जे के अधिकारी को सेवा में वापस लाने के लिए कमिश्नर स्तर की समिति है। यह समिति ही इस बारे में निर्णय लेती है। इस अनुसार सचिन वझे पुलिस में वापस आए थे। देवेंद्र फड़नवीस के आरोप राजनीतिक हैं। उन्हें यह जानकारी है कि यह फाइल सरकार के पास नहीं आती, समिति के पास फाइल जाती है। देशमुख ने कहा कि सचिव वझे जैसे एपीआई दर्जे के अधिकारी को वापस सेवा में लेने का अधिकार न तो उन्हें है और न ही मुख्यमंत्री को। यह अधिकार आयुक्त स्तर की समिति को है।


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