दूध का दूध और पानी का पानी होना जरूरी

एंटीलिया कार में विस्फोटक मामले में जिस तरह एक पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी हुई है और उन्हें हिरासत में भेजा गया है साथ ही अन्य कई पुलिस कर्मियों से गहन पूछताछ हुई है और अभी भी छानबीन जारी है, जिस तरह की खबरें सामने आ रहीं हैं, वह निहायत चिंता की बात है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी मामले की जांच कर रही है और जिस तरह के संकेत अभी तक जांच में समाने आ रहे हैं, वह काफी डरावने हैं. इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसकी तह तक जाना और दूध का दूध और पानी का पानी होना बहुत जरूरी है. निसंदेह ये खुलासे पुलिस के और अधिकारियों को भी सवालों के घेरे में ले रहे हैं और रक्षक कहीं भक्षक तो नहीं बन गया है. ऐसे सवाल भी हर व्यक्ति के मन में खड़ा हो रहा है. वैसे देश में पुलिस महकमे की छवि कभी भी बहुत अच्छी नहीं रही है, इन पर हर तरह के दोषारोपण होते रहे हैं. इस सबके बावजूद महाराष्ट्र पुलिस और विशेषकर मुंबई पुलिस की देश और दुनिया में अपनी छवि है. इसे भारत का स्कॉटलैंड यार्ड कहा जाता रहा है. लेकिन इधर कुछ मामलों में उसे काफी कुछ झेलना पड़ा है, बाद में भले उसकी भूमिका सही पाई गयी हो. एंटीलिया प्रकरण में जिस तरह उसका नाम उछल रहा है, जिस तरह की बातें जांच में सामने आ रही हैं, यह तो अब तक के सभी आरोपों का सिरमौर लग रहा है. स्वाभाविक है कि इस प्रकरण की गूंज महाविकास आघाड़ी सरकार के कोने -कोने में हो रही है. इस मामले के केंद्र में देश का सबसे बड़ा उद्योग पति है तो स्वाभाविक है कि यह सवाल उठेगा की इस व्यवस्था में पुलिस के सामने आम आदमी की क्या हैसियत है. आवश्यक है कि इस मामले की पूरी गंभीरता पूर्वक जांच हो और यह पता चले की यह प्रकरण एक व्यक्ति या कुछ लोगों तक सीमित है यह उसे बड़ा है और जांच कर उसका खुलासा किया जाए. साथी ही दोषी पाए गये व्यक्तियों के खिलाफ कड़े कदम उठाये जाएं. इसमें उस गाड़ी का इस्तेमाल होना जो पुलिस कर्मी उपयोग करते थे, किसी भी सोचने समझे वाले व्यक्ति का दिमाग सुन्न करने के लिए काफी है. आखिर हमारे देश में हो क्या रहा है? अभी सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण, पूजा चव्हाण प्रकरण से महाराष्ट्र पुलिस दो चार हो ही रही थी कि ऐसे में यह नया रहष्योद्घाटन उसकी छवि के लिए काफी नुकसान दायक है. साथ ही पूरी पुलि​िसया व्यवस्था को भी संदेह के घेरे में खड़ा करती है. आखिर कैसे ऐसे लोग विभाग में इतने मह्त्वपूर्ण हो जाते हैं जो ऐसा कुछ कर सकते हैं जैसे वझे के मामले में सामने आ रहा है. पुलिस व्यवस्था और कार्य प्राणाली को लेकर भी देश स्तर पर एक बार समीक्षा की जरुरत यह इस प्रकरण से महसूस हो रहा है. राज्य सरकार को भी इस वारदात की गम्भीरत पूर्वक लेते हुए वह हर कदम उठाने की जरूरत है, जिससे जनता का विश्वास व्यवस्था पर कायम रहे. कानून व्यस्था और जन सुरक्षा पुलिस के पहली जिम्मेदारी है, यदि उनका इसके अलावा कोई और काम है यदि इसका रंचमात्र संकेत भी किसी तरह से समाज में जाता है तो यह ना उसकी सेहत के लिए ठीक है ना सामज के. एंटीलिया प्रकरण की अभी तक की जांच से जो तथ्य सामने आ रहे हैं, कुछ इसी तरह के संकेत दे रहे हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी इसकी तह में जा रही है. जल्द ही इसका पर्दाफास होने की उम्मीद है, यह वक्त की मांग भी है .एक बार यह हो जाय और जो दोषी हैं उनका बन्दोबस्त हो जाए उसके बाद व्यवस्था के मूल्यांकन की भी जरुरत है साथ ही सख्त कदम उठाने की भी जरूरत है, पुलिस की छवि में बट्टा लगने से और आम जनमानस में उसकी छवि अभी भी डरावनी होने के चलते आज भी आम आदमी वहां जाने से हिचकता है. ऐसा माहौल कब तक दिखेगा.


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