उदय जे देसाई की जमानत याचिका खारिज

करोड़ों का बैंक घोटाला

प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ्रोस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड कानपुर के प्रबंध निदेशक उदय जे देसाई को जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जेल में लंबे समय से रहने और ट्रायल शीघ्र पूरा न होने के आधार पर षड्यंत्र के जरिए करोडों रुपए का बैंक फ्राड करने के आरोपी को जमानत पर नहीं रिहा किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जेल में जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं। याची पर 4041 करोड़ रुपए बैक का नुकसान करने के षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप है। रोटोमैक कंपनी के साथ मिलकर कंपनियों का गलत आर्थिक आंकड़ा दिया और आर्थिक अपराध किया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति ओम प्रकाश ने उदय जे देसाई की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है। देसाई की ओर से अर्जी पर वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग खन्ना तथा सीरियस फ्राड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व संजय कुमार यादव ने बहस की। याची के अधिवक्ताओं का कहना था कि याची जेल में है। विवेचना पूरी हो चुकी है। चार्जशीट दायर हो चुकी है। पूछताछ के लिए हिरासत मे रखने की जरूरत नहीं है। याची की बेटी कैंसर मरीज है। अंतिम स्टेज पर है। उसके देखभाल की जरूरत है। मुकद्दमे का ट्रायल जल्दी होने की संभावना भी नहीं है। सभी आरोप दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित हैं। जिसमें छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं है। मुख्य आरोपी रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी, सह अभियुक्त सुनील वर्मा व अनूप बढेरा को सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है। उन्होने कंपनी एक्ट की धारा 212 (6) की वैधता को चुनौती दी है।


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