आर्थिक संकट में दोबारा एसटी महामंडल

वेतन देने के लिए सरकार से मांगेगी कर्ज


मुंबइ

पिछले कई दिनों से बढ़ते कोरोना संक्रमितों की संख्या के कारण एसटी महामंडल में यात्रियों की संख्या कम हो गई है। इसके कारण आमदनी घटने से एक बार फिर से एसटी संकट में आ गई है। परिवहन मंत्री अनिल परब ने बताया कि पिछले एक साल से आर्थिक संकट की मार झेल रही महामंडल अभी उबर भी नहीं पाई थी कि महामंडल पर दोबारा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लॉकडाउन के पहले एसटी महामंडल की हर महीने 21 करोड़ की कमाई होती थी जो कोरोना के कारण एसटी बसों के बंद होने से पूरी तरह ठप्प हो गई थी। 

गौरतलब हो कि राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या नियंत्रित होने और सामान्य स्थिति के बाद धीरे-धीरे शुरू हुई एसटी बसों के संचालन से महामंडल की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी थी। मार्च महीने में कमाई 17 तक पहुंच गई थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या से यात्रियों की कमी होने लगी, जिसने एक बार फिर एसटी महामंडल को संकट में डाल दिया है। परब ने कहा कि कई महीनों तक बंद रही एसटी बसों के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए सरकार ने कर्ज के रूप में एक हजार करोड़ रुपए महामंडल को दिया था। कर्मचारियों को वेतन देने के लिए एक बार फिर सरकार से महामंडल कर्ज देने की मांग करेगी, जिस पर चर्चा के लिए मंगलवार को महामंडल की बैठक आयोजित की गई है। एसटी महामंडल में एक लाख से अधिक कर्मचारी काम करते है, जिन्हे हर महीने 292 करोड़ रुपए वेतन दिया जाता है। अगर राज्य में कोरोना की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कर्मचारियों को अप्रैल के बाद वेतन देने के लिए सरकार से दोबारा कर्ज लेना पड़ेगा।

 लोकल सेवा सामान्य होने के बाद मुंबई से हटेगी एसटी

कोरोना के कारण मुंबई में पिछले करीब एक साल से 12 हजार से अधिक शुरू एसटी बस सेवा तब तक जारी रहेगी, जब तक मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा सामान्य रूप से शुरू नहीं हो जाती। लोकल ट्रेन बंद होने और बड़ी संख्या में बेस्ट चालकों के कोरोना की चपेट आने के बाद जनता की परेशानियों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाली एसटी को मुंबई में शुरू किया गया है।


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