हम सब लापरवाह

कोरोना वायरस की नई वेव और स्ट्रेन ने महाराष्ट्र, केरल, गुजरात, पंजाब, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित लगभग आठ राज्यों में कोहराम मचाना शुरू कर दिया है। एक ही दिन में देश में लगभग 44 हजार कोरोना संक्रमितों की संख्या आना शुरू हो गई है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि वायरस से मरने वालों का प्रतिशत भी बढ़ रहा है। लोगों की घोर लापरवाही के कारण देश पर एकबार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

 वायरस का नया स्ट्रेन बेहद परेशान करने वाला है। ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बाद फ्रांस और अब भारत में भी पाया गया है। वहां कई ऐसे संक्रमित मामले मिले हैं, जिसने विज्ञानियों को भी चुनौती दे दी है। नए वायरस से लोगों के संक्रमित होने के बावजूद उनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। अहम सवाल यह है कि नया स्ट्रेन विकराल रूप ले, इसके पहले ठोस रणनीति बनाए जाने की जरूरत है कि इससे कैसे निपटा जाए? कहीं ऐसा न हो कि देश में एकबार फिर पहले जैसे हालात बन जाएं। विकराल होती इस बीमारी से निपटने की युक्ति और रणनीति पर विचार करने के पहले हमें इस पर चिंतन कराना होगा कि आखिर यह समस्या बढ़ क्यों रही है और इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं? सर्वविदित है कि जब गत वर्ष चीनी वायरस का प्रकोप हमारे देश में बढ़ रहा था, 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संपूर्ण देश में लॉकडाउन कर दिया था। ऐसा करने के चलते कोरोना संक्रमण को रोकने अथवा कम करने में मदद मिली थी, लेकिन यह भी सचाई है कि इसके कारण देश की उत्पादकता और अर्थव्यवस्था चरमरा गई। उससे निजात पाने के लिए सरकार और जनता आज भी संघर्ष कर रही है।

 सरकार ने सख्ती बरती और लोगों ने सावधानी। इससे वायरस के संक्रमण पर नियंत्रण संभव हो सका। लेकिन स्थितियां जैसे ही कुछ सामान्य होना शुरू हुईं, लोगों ने घोर लापरवाही बरतना शुरू कर दिया है। लोगों ने मास्क और सेनिटाइजर से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। सार्वजनिक स्थागनों पर भी बिना मास्क के नजर आ रहे हैं। शादी-विवाह समारोह, चुनावी रैलियां, अन्य सार्वजनिक समारोहों, बस, ट्रेन, मेट्रो इत्यादि में लोग बिना मास्क नजर आ रहे हैं। समारोहों और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का प्रयोग करते समय सोशल डिस्टेंसिंग सहित कोरोना प्रोटोकाल की धज्जियां जमकर उड़ाई जा रही हैं। कई प्रदेशों में बहुत तेजी से संक्रमण बढ़ रहा है। महाराष्ट्र , गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश के कई जिलों में प्रदेश सरकारों ने अलग-अलग तरीके से कर्फ्यू या लॉकडाउन अथवा कुछ प्रतिबंधों की घोषणा की है।

 एक वर्ष पूर्व संपूर्ण भारत में लॉकडाउन करने के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य यह था कि उस समय देश इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार नहीं था। उसके पास मास्क, सेनिटाइजर, वेंटीलेटर और अस्पतालों तक की भीषण कमी थी। इसलिए ऐसा करना सरकार की मजबूरी थी। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। भारत मास्क, सेनिटाइजर, वेंटीलेटर बनाने के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है। हमने कोरोना की वैक्सीन भी तैयार कर ली है और चार करोड़ से अधिक लोगों को यह टीका लग भी चुका है। कहने का आशय यह है कि अब हम महामारी से लड़ने में सक्षम हैं। लेकिन अत्यंत चिंताजनक बात यह है कि जो नया स्ट्रेन भारत में आया है, वह कोरोना की आरटीपीसीआर जांच में पकड़ में नहीं आ रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि नए स्ट्रेन का स्पामइक प्रोट्रीन कई बार म्युैटेट हो चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि भारत में कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन आ चुका है।

 निस्संदेह, इसबार हम पहले की अपेक्षा अधिक तैयार हैं, पर हमारी जरा-सी लापरवाही बहुत महंगी पड़ सकती है। नया कोरोना वायरस न केवल टेस्ट से पकड़ में आ रहा है, बल्कि वह पिछली बार की तुलना में अधिक घातक है। इसके अलावा उसके फैलने की रफ्तार भी कई गुना तेज है। इस वास्तविकता को हर नागरिक को समझने की जरूरत है। वैक्सीन हर राज्य में पर्याप्त‍ मात्रा में पहुंच चुकी है, लेकिन कई ऐसे राज्य हैं, जहां लोग वैक्सी‍न लगवाने के प्रति उदासीनता दिखा रहे हैं और सरकारी स्टोर वैक्सीन से भरे पड़े हैं। लोग मास्क और सेनेटाइजर से परहेज कर रहे हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने में अभी भी सावधानी बरतने की जरूरत है।

 लॉकडाउन इस समस्या का समाधान नहीं है। अगर लॉकडाउन फिर लगाना पड़ा तो हमारी अर्थव्यवस्था फिर कई साल पीछे चली जाएगी। भारत पर गंभीर संकट मंडरा रहा है, इसलिए देश के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें ज्यादा सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। हम इसका बिल्कुल इंतजार न करें कि सबकुछ सरकार करे अथवा वह हम पर प्रतिबंध लगाए और हम उसका अनुसरण करने को बाध्य हों।

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