पेट में पल रहे बच्चे के लिए फायदेमंद है आलूबुखारा

alubukhara

खून बढ़ाए

आलूबुखारे में आयरन होने से खून की कमी पूरी करने में मदद मिलती है। असल में, गर्भावस्था के दौरान एनीमिया का खतरा होने से प्रीमैच्‍योर बर्थ या लो बर्थ वेट की समस्‍या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आलूबुखारे का सेवन करना फायदेमंद रहता है।

पाचन करे दुरुस्त

इसमें फाइबर होने से पाचन तंत्र मजबूत रहता है। ऐसे में कब्ज, एसिडिटी, अपच आदि पेट संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु का बेहतर विकास होने में मदद मिलती है।

थकान मिटाए

इस दौरान थकान, कमजोरी होना आम बात है। ऐसे में मैग्‍नीशियम से भरपूर इस फल का सेवन करने से थकान व कमजोरी दूर होकर एनर्जेटिक महसूस होता है।

गर्भाशय की मांसपेशियों करे रिलैक्‍स

इसके सेवन से गर्भाशय की मांसपेशियां रिलैक्‍स रहती है।

मजबूत हड्डियां

विटामिन ए, के, प्रोटीन, कैल्शियम से भरपूर आलूबुखारा मांसपेशियों व हड्डियों में मजबूती दिलाता है। साथ ही बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

आंखों की रोशनी बढ़ाए

इसमें विटामिन ए होने से आंखों की रोशनी बढ़ने में मदद मिलती है। साथ ही आंखों से जुड़ी समस्याओं से आराम रहता है।

इतनी मात्रा में आलूबुखारे खाना सही

गर्भावस्था में हर चीज सोच-समझ कर खाने की जरूरत होती है। ताकि मां और बच्चे को किसी तरह का कोई नुकसान ना हो। ऐसे में बात इसे खाने की करें तो प्रेग्नेंसी में महिलाएं एक दिन में करीब 150 से 200 ग्राम आलूबुखारे का सेवन कर सकते हैं।

ऐसी परेशानी में ना खाएं आलूबुखारा

  • जिन महिलाओं को किडनी स्टोन की समस्या है या रह चुकी हो। वे भी इसका सेवन ना करें।
  • इसके अलावा भी किडनी संबंधी समस्या होने पर इसका सेवन करने से बचें।
  • इसका अधिक सेवन करने से वजन बढ़ सकता है। ऐसे में इसे ज्यादा खाने से बचें।

ऐसे आलूबुखारा खरीदें

हमेशा लाल व गहरे रंग के सही आलूबुखारा खरीदें। टेढ़े-मेढ़े व झुर्रियां वाले आलूबुखारा ना लें। इसे प्लास्टिक की थैली, टोकरी या किसी कंटेनर में डाल कर फ्रिज में स्टोर करें। साथ ही इसे हमेशा अच्छे से धोकर खाएं।


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