अमेरिकी बाजारों में निवेश करते समय बरतें सावधानी


नई दिल्ली 
 

संयुक्त राज्य अमेरिका वैश्विक वित्तीय केंद्र और नए युग के नवाचारों का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका और इसके बाजारों में हर दिन होने वाले विकास अक्सर दुनियाभर में माल की कीमत, विनिर्माण उत्पादन और व्यापार को प्रभावित करते हैं। इस कारण यह दुनियाभर के निवेशकों को आकर्षित करता है। अमेरिकी बाजारों में निवेश करते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए एक बारे में बता रहें हैं एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट-डीवीपी ज्योति रॉय। अमेरिकी शेयरों में निवेश से दुनिया के बाकी हिस्सों में भी संभावनाएं खुल सकती हैं। अमेरिकी बाजारों में सूचीबद्ध अधिकांश कंपनियां प्रमुख वैश्विक समूह हैं, जो एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया आदि के कुछ हिस्सों में अपने रीजनल ऑपरेशंस का संचालन करते हैं। जाहिर है कि मुख्यालय में निर्णय लेने से दुनिया के अन्य हिस्सों में ऑपरेशंस पर परिणाम होंगे। एक सवाल जो अक्सर भारतीय निवेशक पूछते हैं वह अमेरिकी बाजार में शेयरों के व्यवहार्य होने की चिंता से जुड़े होते हैं। प्रमुख अमेरिकी निगमों में भारतीय निवेशक रुचि रखते हैं, पर शेयर के बहुत ज्यादा मूल्य उन्हें शेयरों पर सट्टेबाजी से हतोत्साहित करते हैं। हालांकि, कई ब्रोकरेज फर्म और वित्तीय संस्थान उन्हें अब विकल्प दे रहे हैं। उनके माध्यम से, अमेरिकी शेयरों में निवेश किया जा सकता है। यह सुनिश्चित भी किया जा सकता है कि भारतीय निवेशक हाई वैल्यू के बोझ में नहीं दबे हैं और इसका उत्तर फ्रेक्शनल ट्रेडिंग हो सकता है। दूसरा विकल्प अमेरिका में ब्रोकरेज खाता खोलना है, क्योंकि कई भारतीय वित्तीय सेवा प्रदाता भारतीय निवेशकों के लिए इसकी सुविधा दे रहे हैं। इसके अलावा वे रुपये में ईटीएफ और यूएस-विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय म्यूचुअल फंड में भी निवेश कर सकते हैं। इन जैसे विकल्प निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की विविधीकरण रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें वैश्विक नवप्रवर्तकों पर दांव लगाने का अवसर मिलता है। 


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