शिया मुसलमानों से मुंबई कांग्रेस की बेवफाई

कमेटी से किया बेदखल

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मुंबइ

परिवारवाद के घोड़े पर सवार मुंबई कांग्रेस ने पार्टी के निष्ठावानों के साथ- साथ शिया मुस्लिम नेताओं के साथ भी बेवफाई की है। 169 पदाधिकारियों की जंबो कमेटी में एक भी शिया मुस्लिम को शामिल करने की जहमत मुंबई कांग्रेस ने नहीं उठाई है। पुरानी कमेटी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे मौलाना जहीर अब्बास रिजवी और महासचिव जावेद श्रॉफ को नई कमेटी में जगह नहीं मिली है।

वोट बैंक की राजनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वोट बैंक की राजनीति के तहत मौलाना जहीर अब्बास रिजवी और जावेद श्रॉफ का पत्ता कटा है। मुंबई में शिया मुसलमानों की आबादी छह लाख है, लेकिन एक भी शिया मुस्लिम को मुंबई कांग्रेस कमेटी में जगह नहीं दी गई है। पार्टी में प्रतिभा और क्षमता से ज्यादा वोट बैंक को तवज्जो दी जाती है। पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना जहीर अब्बास रिजवी ने बताया कि वे मुरली देवड़ा की अध्यक्षता में भी पार्टी संगठन में काम कर चुके हैं। रिजवी ने कहा मैं 40 साल से पूरी ईमानदारी से पार्टी के लिए काम कर रहा हूं। मेरे दामन पर कभी दाग नहीं लगा। उन्होंने बड़े दुखी मन से सवाल किया कि आखिर मुझे क्यों हटाया गया, यह मेरे समझ से परे है। पार्टी कार्यकर्ता सवाल पूछ रहे हैं कि संकट के समय पार्टी छोड़ने वाले वीरेंद्र बक्षी को कमेटी में सम्मान मिलता है, तो जहीर अब्बास रिजवी जैसे निष्ठावान व प्रतिभावान नेताओं को कमेटी से बाहर कर अपमानित क्यों किया जा रहा है।

राजस्थानियों की भी उपेक्षा

जंबो कमेटी के बावजूद मुंबई कांग्रेस में राजस्थानियों की भी उपेक्षा हुई है। पुरानी कमेटी में भंवर सिंह राजपुरोहित उपाध्यक्ष और एडवोकेट सुशील व्यास महासचिव थे। नई टीम में इन दोनों  सीनियर लीडर को जगह नहीं मिलने से पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल है। मुंबई कांग्रेस कोआपरेटिव सेल के पूर्व अध्यक्ष दिलीप राजपुरोहित ने बताया कि कमेटी में राजस्थानियों को उचित प्रतिनिधित्व न देकर पार्टी ने राजस्थानी समाज के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि भंवर सिंह राजपुरोहित बहुत सीनियर लीडर हैं, उन्हें हटाना गलत है। मुंबई मनपा चुनाव सिर पर है, ऐसे में हमारे पास अपना नेतृत्व नहीं रहेगा तो हम अपने समाज के पास मजबूती से अपना पक्ष कैसे रख सकेंगे। राजपुरोहित ने कहा मनपा में हमारा मुकाबला भाजपा से है। मुंबई भाजपा के अध्यक्ष मंगलप्रभात लोढ़ा राजस्थानी समाज से हैं। ऐसे में हमारा नेतृत्व राजस्थानी समाज  का सीनियर लीडर नहीं करेगा तो हम मनपा चुनाव में भाजपा से मुकाबला कैसे करेंगे। राजस्थान में हमारी सरकार है। राजस्थानी समाज वापस कांग्रेस की ओर लौटा है। हमारे पास अच्छा मौका था। पर नई कमेटी से निराशा हमारे हाथ लगी है।


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