बाल विवाह पर 2 साल की सजा

जयपुर

अगले माह आने वाली आखातीज को देखते हुए राजस्‍थान की गहलोत सरकार सतर्क हो गई है। राजस्थान में बाल विवाह के पुराने प्रचलन के कारण अक्षय तृतीया यानी आखातीज पर खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग नाबालिग लड़के और लड़कियों को सात फेरों के बंधन में बांध देते हैं। यह कानूनन अपराध (Legal offenses) है। इसको जानते-बूझते हुए भी लोग बाल विवाह कराने में गुरेज नहीं करते हैं। इस पर रोक लगाने के लिये गहलोत सरकार ने प्लान बनाकर उसे लागू करने के आदेश भी जारी कर दिए हैं। बाल विवाह निषेध अधिनियम- 2006 के अंतर्गत विभिन्न धाराओं के तहत सजा का प्रावधान है। बाल विवाह निरस्त की धारा-3 के अंतर्गत जिस भी बच्चे का बाल विवाह हुआ है वो बालिग होने के दो वर्ष बाद तक अपना बाल विवाह निरस्त कराने का अधिकार रखता है। लड़की 20 साल तक और लड़का 23 वर्ष तक बाल विवाह निरस्त करवा सकता है। देशभर में बाल विवाह का सामाजिक कलंक झेल रहे राजस्थान में बाल विवाह की रोकथाम के लिए गहलोत सरकार ने सरपंच से लेकर मास्टरजी की जवाबदेही तय कर दी है।

 बाल विवाह होने की सूचना अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने निकटतम थाने में देनी होगी. विवाह के लिए छपने वाले निमंत्रण-पत्र में वर-वधु के आयु का प्रमाण प्रिंटिंग प्रेस वालों को रखना होगा. निमंत्रण-पत्र में वर और वधू की उम्र का उल्लेख भी करना होगा.

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