मार्च में 55.4 रहा PMI

PMI

नई दिल्ली

देशभर में फैल रही कोरोना की दूसरी लहर का असर फैक्ट्रियों के आउटपुट पर भी देखने को मिल रहा है। मार्च में PMI इंडेक्स घटकर 55.4 पर चला गया है जो कि फरवरी महीने में 57.5 पर था। IHS मार्किट की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मार्च महीने में प्रोडक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कारखानों में होने वाले प्रोडक्शन इस समय 7 महीने के निचले स्तर पर आ गया है।

देशभर में तेजी से बढ़ रहे कोरोना का असर फैक्टरी आउटपुट पर साफ देखने को मिल रहा है। आपको बता दें अगर पीएमआई इंडेक्स अगर 50 के ऊपर रहती है तो इकोनॉमी को बेहतर माना जाता है। वहीं, अगर 50 के नीचे रहती है तो इसका मतलब है कि आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है।

पीएमआई का 50 से अधिक का आंकड़ा वृद्धि, जबकि इससे नीचे का आंकड़ा संकुचन को दर्शाता है। आईएचएस मार्किट की एसोसिएट निदेशक (इकनॉमिक्स) पॉलियाना डि लीमा ने कहा, ‘‘उत्पादन, नए ऑर्डर और खरीद के आंकड़ों की वृद्धि सुस्त रही है।’’ लीमा ने कहा कि रोजगार के मोर्चे पर अच्छी खबर नहीं मिल रही है। मार्च में भी रोजगार में गिरावट आई। इस तरह छंटनी का सिलसिला शुरू हुए अब एक साल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मार्च में कारोबारी विश्वास डगमगाया है। हालांकि, कुछ कंपनियों का कहना है कि आगामी 12 माह में उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, लेकिन अधिकांश कंपनियां मानती हैं कि स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी।

इसके अलावा पिछले महीने इनपुट और आउटपुट कॉस्ट बढ़ने की रफ्तार धीमी रही है। फरवरी में महंगाई दर में नरमी रही और यह RBI के 2-6 फीसदी टारगेट के भीतर रहा।

आपको बता दें पीएमआई के जरिए मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की आर्थिक स्थिति के बारे में पता लगाया जाता है। देश की आर्थिक स्थिति का आकलन PMI के जरिए होता है। इससे अर्थव्‍यवस्‍था के बारे में सटीक संकेत पहले ही मिल जाते हैं।


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