जल्द ही 76 के स्तर को पार करेगा भारतीय रुपया


मुंबई

अप्रैल में वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बनी रही, जिससे भारतीय रुपए में 1.5% की कमजोरी देखी गई। इस महीने में सेंसेक्स और निफ्टी भी क्रमशः 4.5 से 3.3% तक लुढ़के। इसके विपरीत यूएस डॉलर इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत गिर गया, जबकि एसएंडपी 500 ने इस महीने में 4 प्रतिशत से अधिक लाभ अर्जित किया। एंजल ब्रोकिंग लिमिटेड की रिसर्च एनालिस्ट- करेंसी, हीना नाइक ने बताया कि इस बात की संभावना है कि यह कमजोरी कुछ और समय जारी रहेगी और मुद्रा जल्द ही निकट अवधि में 76 के स्तर को पार कर जाएगी। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारतीय इक्विटी और मुद्रा में गिरावट मुख्य रूप से घरेलू कारणों से हुई।

जाहिर तौर पर कोरोनावायरस का एक नया वैरिएंट, जिसमें तथाकथित डबल म्यूटेशन हुआ है, ने भारत में नए मामलों में सुनामी ला दी है और नंबर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके कारण तकरीबन सभी राज्यों में सख्त प्रतिबंध और लॉकडाउन लगाए गए हैं, जिसकी वजह से निवेशकों ने भारी मात्रा में बिकवाली की। रिपोर्ट के अनुसार, एफपीआई ने अप्रैल में अब तक भारतीय बाजारों से कुल 4,615 करोड़ रुपए निकाल लिए हैं।

उपरोक्त कारण के अलावा, बाजारों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण फैक्टर आरबीआई का पॉलिसी स्टेटमेंट था। समिति ने रेपो दर को 4 प्रतिशत पर कायम रखने का फैसला किया और विकास को कायम बनाए रखने के लिए आवश्यक नीतिगत रुख बरकरार रखा। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में 1 लाख करोड़ रुपए तक के बॉन्ड्स की खरीद का खर्च उठाने और अर्थव्यवस्था की रिकवरी के लिए सॉवरेन डेट मार्केट के जरिए राहत देने का भी वादा किया। पॉलिसी की बैठक से एक दिन पहले यानी 6 अप्रैल 2021 को 10-वर्षीय भारतीय बेंचमार्क यील्ड 6.12 प्रतिशत पर कारोबार कर रही थी। आरबीआई ने पॉलिसी पर बैठक के बाद ऋण खरीद का स्पष्ट आश्वासन दिया, जिससे 10-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड दो दिनों के भीतर 6.01 प्रतिशत तक गिर गई। इसके विपरीत, भारतीय रुपया 75.00 के स्तर को पार करते हुए तेजी से कमजोर हुआ क्योंकि आरबीआई द्वारा किए गए कटाव का लाभ तुर्की, रूस और ब्राजील जैसे अन्य उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों ने उठाया। बहुत से व्यापारी रुपए में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे, उन्होंने बहुत सारे कैरी ट्रेड्स किए थे, लेकिन पॉलिसी जारी करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इनमें से कुछ पोजिशन छोड़ी दी, जिससे मुद्रा में गिरावट हो गई। इन सभी फैक्टरों ने स्थानीय इकाई को अप्रैल-21 में एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा में से एक बना दिया है। नए प्रतिबंध और लॉकडाउन ने पहले से ही आर्थिक गतिविधियों को कमजोर कर दिया है और इससे और अधिक बहिर्वाह होगा और यह खराब होता जाएगा। दूसरी ओर, आरबीआई, सरकारी बैंकों के माध्यम से लगातार हस्तक्षेप करके रुपए में इस भारी अस्थिरता को दबाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उनकी अपनी सीमाएं हैं। 

कई शीर्ष बैंक और ब्रोकरेज हाउस वित्त वर्ष 22 के लिए भारत के जीडीपी पूर्वानुमानों को डाउनग्रेड कर रहे हैं, ऐसे में देश के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आगे के संशोधनों से बचने के लिए कोविड-19 मामलों को काबू में लाया जाए जो स्थानीय इक्विटी और भारतीय रुपए को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकते हैं।


Labels:

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget