तत्काल सुनवाई के लिए एससी पहुंचा केंद्र

ISRO जासूसी मामला ,जांच समिति ने बंद लिफाफे में सौंपी है रिपोर्ट


नई दिल्ली

केंद्र ने इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन से जुड़े 1994 के जासूसी मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों की भूमिका संबंधी उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर तत्काल सुनवाई का निवेदन करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक को बरी करते हुए बाद में 50 लाख रुपए का मुआवजा देने का भी फैसला किया था। 

सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने त्वरित सुनवाई के लिए इस मामले का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया। पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई अगले हफ्ते की जाएगी। मेहता ने पीठ को बताया कि समिति ने रिपोर्ट दायर कर दी है और इस पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है। पीठ ने कहा कि वह इसे महत्वपूर्ण मामला मानती है लेकिन त्वरित सुनवाई आवश्यक नहीं है। पीठ ने कहा, अगले सप्ताह सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश डी के जैन की अध्यक्षता में 14 सितंबर, 2018 को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था और केरल सरकार को नारायणन के घोर अपमान के लिए उन्हें 50 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने नारायणन का उत्पीड़न करने और उन्हें अत्यंत पीड़ा पहुंचाने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कदम उठाने के लिए एक समिति गठित करने का आदेश देते हुए केंद्र और राज्य सरकार से समिति में एक-एक अधिकारी नामित करने को कहा था। 

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को मनोरोग व्यवहार करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2018 में कहा था कि उन्हें हिरासत में लेकर उनकी स्वतंत्रता एवं गरिमा को खतरे में डाला गया और बाद में पूर्व के प्रत्येक गौरव के बावजूद निंदनीय अभद्रता का सामना करने पर मजबूर होना पड़ा।

तीन सदस्यी जांच समिति ने बंद लिफाफे में सौंपी है रिपोर्ट

जासूसी का यह मामला दो वैज्ञानिकों और चार अन्य द्वारा भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े कुछ गोपनीय दस्तावेजों को दूसरे देशों को दिए जाने के आरोपों से जुड़ा है। वैज्ञानिक को उस वक्त गिरफ्तार किया था जब केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी। तीन सदस्यी जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट हाल में ही सुप्रीम कोर्ट को बंद लिफाफे में सौंपी है। सीबीआई ने अपनी जांच में कहा था कि केरल में उस वक्त के शीर्ष अधिकारी नारायणन की गैरकानूनी गिरफ्तारी के लिए जिम्मेदार थे।


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