बढ़ने लगा कोरोना, होने लगा पलायन

लॉकडाउन के डर से गांव जाने को मजबूर   

crowd

मुंबई 

पिछले वर्ष जिस तेजी के साथ कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ा था, वही हालात फिर पैदा होने लगे हैं। लॉकडाउन लगाए जाने की संभावना को देखते हुए झोपड़पट्टी में रहने वाले बड़ी संख्या में मजदूर पलायन को मजबूर हो गए हैं। पिछले वर्ष के अनुभव को देखते हुए कारखानों, फैक्ट्रियों और बिल्डरों के प्रोजेक्ट में काम करने वाले मजदूर होली एवं अन्य त्योहारों का बहाना बनाकर बड़ी संख्या में अपने गांव की ओर रवाना होने लगे हैं। 

लॉकडाउन को लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी ने आग में घी डालने का काम किया है। लॉकडाउन लगाए जाने की खबर से मजदूरों में बेचैनी बढ़ गई है। इनका मानना है कि यदि फिर से लॉकडाउन लगा तो उनकी हालत पिछले साल से भी बेकार हो जाएगी।

पंचायत चुनाव भी कारण   

लॉकडाउन के खतरे के बीच अप्रैल महीने से उत्तर प्रदेश में शुरु हो रहे पंचायत चुनाव भी इस पलायन का बड़ा कारण माना जा रहा है। मजदूरों का मानना है कि लॉकडाउन लगा तो मुंबई में ही फंस कर रह जाएंगे। पंचायत चुनाव के लिए परिचित महीने से ही गांव आने का आमंत्रण दे रहे थे। ऐसे में श्रमिक गांव जाना ही बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा इन दिनों गांवों में गेहूं की कटाई और मड़ाई भी चल रही है, लोग इस कारण भी गांव जा रहे हैं।  

स्टेशनों पर प्रवासी मजदूरों की बढ़ी भीड़

मुंबई से उतर भारत की तरफ जाने वाली ट्रेनों में लॉकडाउन की खबर से भीड़ बढ़ गई है। वर्तमान में लंबी दूरी वाली ट्रेनें पूरी क्षमता से नहीं चल रही हैं, जिसके चलते मुंबई से बाहर जाने के लिए स्टेशनों पर भीड़ बढ़ गई है। इसलिए वहां अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। म्हाडा के एक अधिकारी ने बताया कि पिछली साल मुंबई छोड़कर गए मजदूरों में से लगभग 20 फीसदी मजदूर मुंबई वापस नहीं आए हैं। यदि इस बार भी ऐसा हुआ तो इमारतों के निर्माण पर बड़ा असर पड़ सकता है। कंस्ट्रक्शन साइट पर ज्यादातर उड़िया मजदूर काम करते हैं। काम चल रहा है साथ ही मजदूरों का पलायन भी शुरु हुआ है।


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