वैक्सीन ने रोकी कोरोना की रफ्तार

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नई दिल्ली

भारत इन दिनों कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है। पूरे देश में हाहाकार की स्थिति है। कुछ समय पहले यही हालात दुनिया के बाकी विकसित देशों में भी थे। मसलन ब्रिटेन, स्पेन, अमेरिका, इजराइल, इटली जैसे देशों में भी कोरोना की रफ्तार कुछ इतनी ही तेज थी, जितनी आज भारत में है। इन देशों में भी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर कम पड़ गया था। बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, पीपीई किट का संकट आ गया था, लेकिन अब इन देशों के हालात बिल्कुल बदल गए हैं। इसका एकमात्र कारण है वैक्सीनेशन। दुनियाभर के एक्सपर्ट्स का भी यही मानना है कि ज्यादा से ज्यादा वैक्सीनेशन ही कोरोना को रोक सकता है। वैक्सीनेशन का पॉजिटिव रिजल्ट हमें दुनिया के 6 देशों में देखने को मिला। वैक्सीनेशन के पॉजिटिव रिजल्ट का सबसे बड़ा उदाहरण UK यानी ब्रिटेन है। यहां पिछले साल 8 दिसंबर से वैक्सीनेशन ड्राइव शुरू हो गया था। तब पूरे देश में हर दिन 60 से 70 हजार नए कोरोना संक्रमित मिलते थे। अस्पतालों में बेड कम पड़ गए थे। हर दिन 1000-1200 मौतें हो रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे वैक्सीनेशन तेज हुई हालात बदलने लगे। फरवरी के बाद से लगातार यहां संक्रमितों की संख्या घट रही है।

भारत में अभी जो हालात हैं, कुछ वैसे ही सितंबर से लेकर जनवरी तक अमेरिका में थे। लेकिन अब वहां पर हालात काफी ठीक हो गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एेसा वैक्सीनेशन के चलते हुआ है।

हर दिन 1 से 3.07 लाख के बीच कोरोना संक्रमित मिल रहे थे। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव भी हुआ। जैसे भारत में नेताओं की रैलियों में भीड़ उमड़ती थी, वैसी ही बेकाबू भीड़ वहां भी रहती थी। ज्यादातर लोग मास्क नहीं पहनते थे। हर दिन 2 से 6 हजार के बीच लोगों की मौतें हो रही थीं, लेकिन पूरे देश ने हार नहीं मानी। वैक्सीनेशन तेजी से हुआ। अब हालात ये है कि यहां की 39.56% आबादी को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इसके चलते संक्रमण की रफ्तार में 80% की गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां हर दिन 1-3 लाख मरीज मिलते थे, अब 50-60 हजार मरीज मिल रहे हैं।


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